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भारत में एआई आत्मनिर्भरता के लिए नई चुनौतियाँ और अवसर

कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच, मोहनदास पई ने भारत में एआई आत्मनिर्भरता के लिए विशेष मिशन की आवश्यकता पर जोर दिया है। एंथ्रोपिक द्वारा विदेशी नागरिकों के लिए एआई मॉडल की पहुंच बंद करने के बाद, उन्होंने सरकार से बड़े निवेश और तकनीकी ढांचे के विकास की अपील की है। जानें इस विषय पर और क्या कहा गया है और भारत को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में कैसे आगे बढ़ना चाहिए।
 

कृत्रिम बुद्धिमत्ता में बढ़ती प्रतिस्पर्धा


कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के क्षेत्र में वैश्विक प्रतिस्पर्धा तेजी से बढ़ रही है। इस संदर्भ में, अमेरिकी कंपनी एंथ्रोपिक के हालिया निर्णय ने भारत में तकनीकी आत्मनिर्भरता पर चर्चा को नया मोड़ दिया है। कंपनी ने अपने कुछ अत्याधुनिक एआई मॉडल विदेशी नागरिकों के लिए उपलब्ध नहीं कराने का निर्णय लिया है। इस घटनाक्रम के बाद, उद्योग के प्रमुख व्यक्तित्व मोहनदास पई ने केंद्र सरकार से एआई क्षेत्र में महत्वपूर्ण कदम उठाने की अपील की है।


विशेष एआई मिशन की आवश्यकता

आरिन कैपिटल के चेयरमैन मोहनदास पई ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भारत के लिए एक विशेष एआई मिशन की स्थापना का आग्रह किया है। उनका मानना है कि देश एआई क्रांति में पीछे है और वर्तमान योजनाएं अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ रही हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार और निजी क्षेत्र को मिलकर एक ऐसा ढांचा तैयार करना चाहिए जो भारत को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूत बना सके।


निवेश की आवश्यकता

पई ने डीप टेक और एआई विकास के लिए हर साल 50,000 करोड़ रुपये के कोष की मांग की है। इसके साथ ही, उन्होंने क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर, हार्डवेयर और चिप निर्माण को बढ़ावा देने के लिए 2 लाख करोड़ रुपये के गारंटी फंड का प्रस्ताव रखा है। उनका मानना है कि भविष्य की तकनीकी शक्ति मजबूत आधारभूत ढांचे से ही विकसित होगी।


एंथ्रोपिक के निर्णय से बढ़ी चिंताएँ

एंथ्रोपिक ने अमेरिकी निर्यात नियंत्रण के कारण फेबल 5 और मिथोस 5 मॉडल की पहुंच विदेशी नागरिकों के लिए बंद कर दी है। हालांकि, कंपनी के अन्य क्लाउड मॉडल पर इसका असर नहीं पड़ा है। यह निर्णय इस बात को दर्शाता है कि अत्याधुनिक तकनीकों तक पहुंच कभी भी नीतिगत कारणों से सीमित हो सकती है।


आत्मनिर्भर तकनीक की आवश्यकता

पूर्व जोहो प्रमुख श्रीधर वेम्बू ने भी कहा कि भारत को अपनी तकनीकी दिशा स्वयं निर्धारित करनी होगी। उन्होंने शोध एवं विकास में निवेश बढ़ाने और ओपन-सोर्स एआई मॉडल अपनाने पर जोर दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि एआई अब केवल व्यापारिक अवसर नहीं, बल्कि राष्ट्रीय क्षमता और तकनीकी संप्रभुता का भी महत्वपूर्ण आधार बन चुका है।


फेबल 5 और मिथोस 5 के बारे में

AI मॉडल फेबल 5 को एडवांस्ड सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग और लंबे ऑटोनॉमस टास्क के लिए विकसित किया गया है। वहीं, मिथोस 5 अधिक शक्तिशाली है, जो साइबर सुरक्षा में कमजोरियों की पहचान कर सकता है। एंथ्रोपिक ने इसे पहले सार्वजनिक रूप से जारी नहीं करने का निर्णय लिया था, लेकिन अब अमेरिका ने विदेशी नागरिकों के लिए इसके एक्सेस पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी है।