भारत में एप्पल का आईफोन प्रोडक्शन बढ़ाने की योजना
भारत में आईफोन उत्पादन में तेजी
एप्पल अपनी चीन पर निर्भरता को कम करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। इसी के चलते, कंपनी भारत में आईफोन के उत्पादन को तेजी से बढ़ा रही है। उद्योग के विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 तक, वैश्विक स्तर पर बिकने वाले सभी आईफोन्स में से लगभग 28 प्रतिशत का उत्पादन भारत में होगा, जबकि यह आंकड़ा 2025 में 23 प्रतिशत था। उल्लेखनीय है कि 2024 में एप्पल की चीन में उत्पादन हिस्सेदारी 83 प्रतिशत थी, जो 2025 में घटकर 74 प्रतिशत रह गई।
चीन में उत्पादन में कमी के कारण
एप्पल यह बदलाव अपनी सप्लाई चेन को सुरक्षित और लचीला बनाने के लिए कर रहा है। कंपनी का उद्देश्य है कि वह चीन पर अपनी निर्भरता को कम करे। इसके अलावा, बढ़ती जियोपॉलिटिकल तनाव, टैरिफ से संबंधित चिंताएं और किसी एक देश पर अत्यधिक निर्भर रहने के जोखिम के कारण, एप्पल अन्य देशों, विशेषकर भारत में अपने उत्पादन को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
भारत में एप्पल का उत्पादन बढ़ेगा
स्मार्ट एनालिटिक्स ग्लोबल और काउंटरपॉइंट रिसर्च जैसी अनुसंधान कंपनियों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत एप्पल के उत्पादन नेटवर्क में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। फॉक्सकॉन और टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे मौजूदा निर्माता देश में अपनी उत्पादन क्षमता को बढ़ा रहे हैं। टाटा समूह ने विस्ट्रॉन और पेगाट्रोन के भारतीय कारोबार को अधिग्रहित किया है, जिससे एप्पल के स्थानीय संचालन को मजबूती मिली है।
भारत अब एप्पल उत्पादों के लिए एक प्रमुख निर्यात केंद्र बन गया है। यहां नए आईफोन मॉडल का उत्पादन किया जा रहा है, जो अमेरिका और यूरोप जैसे बड़े बाजारों में भेजे जा रहे हैं। भारत की उत्पादन लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजना के तहत, एप्पल ने पिछले पांच वर्षों में लगभग 70 बिलियन डॉलर के आईफोन्स का उत्पादन किया है, जिसमें निर्यात का महत्वपूर्ण योगदान है।
चीन क्यों रहेगा मुख्य केंद्र?
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि चीन अपने मजबूत सप्लायर नेटवर्क, कुशल श्रमिक बल, उन्नत लॉजिस्टिक्स और उत्पादन क्षमता के कारण कई वर्षों तक एप्पल का मुख्य उत्पादन केंद्र बना रहेगा।