भारत में ऑटोमोबाइल क्षेत्र में बड़ा निवेश प्रस्ताव: रेनो और जीली का सहयोग
भारत में ऑटोमोबाइल निवेश की नई संभावनाएं
भारत के ऑटोमोबाइल उद्योग में एक महत्वपूर्ण निवेश की संभावना बन रही है। हालिया जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार रेनो और चीन के जीली समूह द्वारा समर्थित हॉर्स पावरट्रेन के लगभग 37 करोड़ डॉलर (लगभग 3,000 करोड़ रुपये) के निवेश प्रस्ताव को मंजूरी देने की योजना बना रही है। यदि यह प्रस्ताव स्वीकृत होता है, तो यह चीन से जुड़े हाल के बड़े विनिर्माण निवेशों में से एक होगा।
हॉर्स पावरट्रेन का परिचय
हॉर्स पावरट्रेन एक संयुक्त उद्यम है, जिसकी स्थापना 2024 में हुई थी। इसमें फ्रांस की रेनो और चीन की झेजियांग जीली होल्डिंग समूह की समान हिस्सेदारी है। इसके बाद सऊदी अरामको ने भी इसमें 10 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदी। वर्तमान में, रेनो और जीली समूह के पास 45-45 प्रतिशत हिस्सेदारी है।
भारत में निवेश के नियम
भारत ने 2020 में सीमा तनाव के बाद चीन से जुड़े निवेशों पर कड़े नियम लागू किए थे। हालांकि, मार्च 2026 में सरकार ने स्थानीय विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए पड़ोसी देशों से आने वाले कुछ निवेशों के लिए नियमों में आंशिक ढील दी। हॉर्स पावरट्रेन का प्रस्ताव इसी नई नीति के तहत मंजूरी पाने वाले पहले बड़े निवेशों में से एक हो सकता है।
निवेश की योजना
कंपनी चरणबद्ध तरीके से भारत में निवेश करने की योजना बना रही है, जिसकी शुरुआत तमिलनाडु के चेन्नई में रेनो के उत्पादन संयंत्र से हो सकती है। यहां उन्नत संकर पावरट्रेन और इंजन का निर्माण किया जाएगा। संकर तकनीक वाले वाहनों में पारंपरिक ईंधन इंजन के साथ इलेक्ट्रिक मोटर और बैटरी का उपयोग किया जाता है, जिससे ईंधन की बचत और बेहतर प्रदर्शन संभव होता है।
रेनो और निसान के लिए पावरट्रेन का उपयोग
इन पावरट्रेन का उपयोग भारत में बिकने वाले रेनो और निसान के वाहनों में किया जाएगा। रेनो, जापान की निसान की प्रमुख हिस्सेदार कंपनियों में से एक है और चेन्नई संयंत्र में निसान के लिए भी वाहन निर्माण करती है।
नए मॉडल की पेशकश
सूत्रों के अनुसार, रेनो इस वर्ष के अंत तक भारत में डस्टर नामक एक नए खेल उपयोगी वाहन का संस्करण पेश कर सकती है, जिसमें हॉर्स पावरट्रेन द्वारा विकसित तकनीक का उपयोग किया जाएगा। इसके अलावा, कंपनी अन्य वाहन निर्माताओं को भी अपने पावरट्रेन उपलब्ध कराने की संभावनाओं पर प्रारंभिक स्तर पर चर्चा कर रही है।
भारत में निवेश की पुष्टि
हॉर्स पावरट्रेन ने यह भी पुष्टि की है कि उसने भारत में निवेश की अनुमति प्राप्त करने के लिए संबंधित अधिकारियों के समक्ष आवेदन जमा किया है और वह औपचारिक निर्णय का इंतजार कर रही है। कंपनी ने भारत को अपने लिए एक महत्वपूर्ण बाजार बताया है।
वैश्विक वाहन कंपनियों के लिए भारत का महत्व
विशेषज्ञों का मानना है कि यह निवेश ऐसे समय में प्रस्तावित है जब भारत वैश्विक वाहन कंपनियों के लिए एक प्रमुख विनिर्माण केंद्र के रूप में उभर रहा है। बढ़ती घरेलू मांग और आपूर्ति श्रृंखला के विविधीकरण की रणनीति के कारण कई वैश्विक कंपनियां भारत में उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर जोर दे रही हैं।
इलेक्ट्रिक और संकर वाहनों की मांग
भारत में पूरी तरह से इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग धीरे-धीरे बढ़ रही है, लेकिन संकर तकनीक वाले वाहनों को उपभोक्ताओं से बेहतर प्रतिक्रिया मिल रही है। ऐसे में एडवांस संकर इंजन निर्माण से जुड़ा यह निवेश भारतीय वाहन उद्योग के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके माध्यम से स्थानीय स्तर पर आधुनिक तकनीक का उत्पादन बढ़ेगा, आयात पर निर्भरता घटेगी और देश के विनिर्माण क्षेत्र को भी नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।