भारत में क्विक-कॉमर्स का तेजी से बढ़ता प्रभाव और श्रमिकों की चुनौतियाँ
क्विक-कॉमर्स का उभार
दुनिया के कई हिस्सों में जहां त्वरित डिलीवरी मॉडल सफल नहीं हो पाया, वहीं भारत में यह पिछले कुछ वर्षों में तेजी से लोकप्रिय हुआ है। शहरी क्षेत्रों में उपभोक्ता अब यह अपेक्षा करने लगे हैं कि किराने का सामान या महंगे इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद, सब कुछ 10 से 15 मिनट के भीतर उनके दरवाजे पर पहुंच जाए। इस कारण क्विक-कॉमर्स भारत के ई-कॉमर्स क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनता जा रहा है.
निवेश और डार्क स्टोर्स का निर्माण
इस गति को बनाए रखने के लिए ज़ेप्टो, ब्लिंकिट और इंस्टामार्ट जैसी कंपनियों ने सैकड़ों मिलियन डॉलर का निवेश किया है। ये कंपनियां आवासीय क्षेत्रों के निकट 'डार्क स्टोर्स' स्थापित कर रही हैं, जो छोटे गोदामों के रूप में कार्य करते हैं और वहीं से त्वरित ऑर्डर भेजे जाते हैं। इसके साथ ही, डिलीवरी कर्मियों की संख्या में भी वृद्धि की गई है, क्योंकि प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ती जा रही है.
डिलीवरी कर्मियों पर बढ़ता दबाव
सेक्टर के विकास के साथ, डिलीवरी से जुड़े कर्मचारियों पर भी दबाव बढ़ा है। हाल की जानकारी के अनुसार, नए साल की पूर्व संध्या पर देश के कई प्रमुख शहरों में दो लाख से अधिक गिग वर्कर्स ने प्रदर्शन किया। ये प्रदर्शन उस समय हुए जब डिलीवरी की मांग अपने चरम पर थी। कर्मचारियों की मांगों में कानूनी सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा लाभ, बेहतर वेतन और ऑटोमेटेड पेनल्टी सिस्टम में बदलाव शामिल थे, जो देर से डिलीवरी पर उनकी रेटिंग को प्रभावित करता है.
सुरक्षा चिंताएँ
कई विशेषज्ञों ने सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की है। त्वरित समयसीमा के दबाव में, डिलीवरी कर्मियों को ट्रैफिक के बीच जल्दी करना पड़ता है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। मानव संसाधन विशेषज्ञों का कहना है कि 10-15 मिनट की डिलीवरी का मॉडल गिग वर्क की तनाव और जोखिम की स्थिति को पूरी तरह से बदल देता है.
ब्लिंकिट का कदम
इस संदर्भ में, श्रमिक संगठनों के विरोध और श्रम मंत्रालय के दबाव के बाद, ब्लिंकिट ने अपने ऐप और प्रचार से '10 मिनट में डिलीवरी' का संदेश हटा दिया है। यह संभावना जताई जा रही है कि अन्य क्विक-कॉमर्स कंपनियां भी भविष्य में ऐसा कदम उठा सकती हैं.
नए श्रम कानूनों का प्रभाव
यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार ने नए श्रम कानूनों के तहत गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को कानूनी मान्यता दी है। इन नियमों के अनुसार, फूड डिलीवरी और राइड-हेलिंग जैसी कंपनियों को अपने वार्षिक राजस्व का एक हिस्सा सरकार द्वारा संचालित सामाजिक सुरक्षा कोष में जमा करना होगा.
गिग अर्थव्यवस्था का भविष्य
सरकारी थिंक टैंक नीति आयोग के अनुसार, भारत की गिग अर्थव्यवस्था में 2020-21 के दौरान लगभग 77 लाख लोग कार्यरत थे। यह संख्या 2029-30 तक बढ़कर लगभग 2.35 करोड़ होने का अनुमान है। ऐसे में, क्विक-कॉमर्स की वृद्धि के साथ-साथ श्रमिकों की सुरक्षा और अधिकारों का संतुलन बनाना आने वाले वर्षों की एक बड़ी चुनौती होगी.