भारत में खाद्य तेलों की कीमतों में गिरावट, सोयाबीन और पाम तेल प्रभावित
खाद्य तेलों की कीमतों में गिरावट
नई दिल्ली, 9 अगस्त: पिछले सप्ताह देश के तेल-तिलहन बाजारों में सोयाबीन तेल, कच्चा पाम तेल (सीपीओ) और पामोलीन तेल की कीमतों में कमी आई। इसके साथ ही, सुस्त व्यापार के कारण मूंगफली तेल की कीमतों में भी हल्की गिरावट देखी गई। दूसरी ओर, कम आवक और आगामी त्योहारों की मांग के चलते सरसों तेल की कीमतों में थोड़ी वृद्धि हुई, जबकि बिनौला तेल की औद्योगिक मांग के कारण इसके दाम में भी सुधार हुआ।
आयातकों की बिकवाली का असर
बाजार के सूत्रों के अनुसार, आयातक बैंकों में अपने कर्ज को घुमाने के लिए लागत से कम दाम पर माल बेच रहे हैं। विदेशों में कीमतें बढ़ने के बावजूद, सोयाबीन तेल की कीमतों में गिरावट आई है। पाम और पामोलीन तेल की स्थिति भी इसी तरह की रही।
खाद्य तेलों की मांग और कीमतें
फिलहाल, सोयाबीन की मांग बनी हुई है, जो अन्य खाद्य तेलों की तुलना में सस्ता है। भारत खाद्य तेलों की लगभग आधी जरूरत के लिए आयात पर निर्भर है, और लागत से नीचे बिकने वाले खाद्य तेलों की स्थिति गंभीर समस्या का संकेत देती है। इस पर ध्यान देने की आवश्यकता है, क्योंकि इससे बैंकों और किसानों को नुकसान हो सकता है।
सरसों और मूंगफली तेल की स्थिति
कम व्यापार के कारण मूंगफली तेल की कीमतों में भी हल्की गिरावट आई। वहीं, त्योहारी मांग के चलते सरसों तेल की कीमतों में सुधार हुआ। बिनौला तेल की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई।
कीमतों का विश्लेषण
पिछले सप्ताह सरसों दाना 50 रुपये की वृद्धि के साथ 8,300-8,350 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ। सरसों तेल दादरी भी 50 रुपये बढ़कर 16,775 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गया। सोयाबीन दाना और लूज का थोक भाव क्रमशः 225 रुपये की गिरावट के साथ 7,300-7,350 रुपये और 7,150-7,250 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।
सीपीओ और पामोलीन की कीमतें
समीक्षाधीन सप्ताह में सीपीओ तेल की कीमत 100 रुपये घटकर 13,800 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुई। पामोलीन दिल्ली में 125 रुपये की गिरावट के साथ 15,650 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।