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भारत में गहरे समुद्र में तेल और गैस खोज के लिए नई लाइसेंसिंग नीति

भारत सरकार ने गहरे समुद्र और बहुत गहरे समुद्र में तेल एवं गैस की खोज के लिए एक नई लाइसेंसिंग नीति की शुरुआत की है। इस नीति के तहत कंपनियों को हर महीने बोली लगाने का अवसर मिलेगा, और वित्तीय शर्तों में भी छूट दी जाएगी। इसके अलावा, सरकार समुद्र मंथन योजना के तहत खोजी कुओं की लागत का 50 प्रतिशत तक वहन करेगी। इस पहल का उद्देश्य घरेलू उत्पादन को बढ़ाना और आयात पर निर्भरता को कम करना है। जानें इस नई नीति के सभी महत्वपूर्ण पहलुओं के बारे में।
 

नई लाइसेंसिंग पहल का शुभारंभ

नई दिल्ली, 5 नवंबर: सरकार गहरे और बहुत गहरे समुद्र में तेल एवं गैस की खोज के लिए एक विशेष लाइसेंसिंग प्रक्रिया शुरू करने जा रही है। इस योजना के तहत कंपनियों को हर महीने बोली लगाने का मौका मिलेगा, साथ ही वित्तीय और प्रक्रियागत शर्तों में भी छूट दी जाएगी। इसके अतिरिक्त, सरकार समुद्र मंथन योजना के तहत 84,084 करोड़ रुपये की लागत का 50 प्रतिशत तक वहन करेगी।


डीजीएच की नई नीति

हाइड्रोकार्बन महानिदेशालय (डीजीएच) ने एक नोटिस में बताया कि विशेष मुक्त क्षेत्र लाइसेंसिंग नीति (ओएएलपी) के तहत गहरे समुद्र में खोजी जाने वाली ब्लॉकों का तेजी से आवंटन किया जाएगा। बोली प्रक्रिया का विस्तृत विवरण जल्द ही जारी किया जाएगा। इस पहल का मुख्य उद्देश्य समुद्र में तेल और गैस की खोज से जुड़ी उच्च लागत और जोखिम को कम करना, निजी निवेश को आकर्षित करना और घरेलू उत्पादन को बढ़ाकर आयात पर निर्भरता को घटाना है।


समुद्र मंथन योजना का वित्तीय समर्थन

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 31 जुलाई, 2026 को समुद्र मंथन योजना को मंजूरी दी थी, जिसके तहत अपतटीय खोज गतिविधियों के लिए 43,200 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इसमें गहरे समुद्र में 60 खोजी कुओं की खुदाई शामिल है। सरकार पात्र कुओं की खुदाई की लागत का 50 प्रतिशत तक वित्तीय सहायता प्रदान करेगी, जो प्रति कुआं अधिकतम 675 करोड़ रुपये होगी। योजना में समुद्र में भूकंपीय आंकड़ों के संग्रह और विश्लेषण के लिए 28,534 करोड़ रुपये, साझा अपतटीय बुनियादी ढांचे के लिए 10,000 करोड़ रुपये और तेल एवं गैस विनिर्माण तथा सेवा क्षेत्र के लिए 2,000 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। सरकार को उम्मीद है कि इससे देश के हाइड्रोकार्बन भंडार में 60 करोड़ टन से अधिक तेल समतुल्य की वृद्धि होगी।


बोली प्रक्रिया की नई व्यवस्था

विशेष ओएएलपी के तहत हर महीने की पहली तारीख को 21 दिन की रुचि पत्र (ईओआई) की अवधि शुरू होगी, जिससे साल में 12 बार बोली लगाने का अवसर मिलेगा। प्रत्येक अवधि के लिए मूल्यांकन और ब्लॉक आवंटन की प्रक्रिया अलग-अलग होगी। नई व्यवस्था में बोली का आधार राजस्व में हिस्सेदारी की पेशकश के बजाय प्रतिबद्ध कार्य कार्यक्रम होगा। ब्लॉक की पहचान करने वाली कंपनी और गहरे समुद्र में खुदाई का अनुभव रखने वाली कंपनी को अलग-अलग 10-10 अंक दिए जाएंगे। डीजीएच ने वित्तीय शर्तों में भी राहत दी है।


वित्तीय शर्तों में छूट

निर्धारित शुद्ध संपत्ति की आवश्यकता को स्वतंत्र रूप से पूरा करने वाली कंपनी को अपनी मूल कंपनी की वित्तीय और प्रदर्शन गारंटी देने की आवश्यकता नहीं होगी। यदि संयुक्त बोली में परिचालक कंपनी ओएनजीसी या ऑयल इंडिया लिमिटेड (ओआईएल) है और वह आवश्यक शुद्ध संपत्ति का पूरा मानदंड पूरा करती है, तो उसके पात्र विदेशी साझेदार की शुद्ध संपत्ति का अलग से आकलन नहीं होगा। इसके लिए साझेदार की शुद्ध संपत्ति कम से कम 10 अरब डॉलर होनी चाहिए।


अन्य महत्वपूर्ण जानकारी

इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय पेट्रोलियम कंपनियों या उनकी अनुषंगी कंपनियों को अपनी हिस्सेदारी पहले से अनुबंध में शामिल भारतीय राष्ट्रीय पेट्रोलियम कंपनी को सौंपने के लिए पूर्व सरकारी मंजूरी की आवश्यकता नहीं होगी।