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भारत में गिग श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा अंशदान का नया विकल्प

भारत में गिग श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा अंशदान लागू करने की योजना के तहत एक नया तकनीकी विकल्प सामने आया है। यह विकल्प एग्रीगेटर कंपनियों के वार्षिक कारोबार या कामगारों के भुगतान के प्रतिशत पर आधारित हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह व्यवस्था विभिन्न क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था पर असमान वित्तीय बोझ डाल सकती है। जानें इस नए विकल्प के संभावित प्रभाव और सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के तहत नियमों के बारे में।
 

गिग और ऑनलाइन प्लेटफार्मों के श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा

भारत में गिग श्रमिकों और ऑनलाइन प्लेटफार्मों पर काम करने वालों के लिए सामाजिक सुरक्षा अंशदान लागू करने की योजना के बीच, नियमों से संबंधित एक तकनीकी विकल्प विभिन्न क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। यह विकल्प इस बात पर निर्भर करता है कि एग्रीगेटर कंपनियों से अंशदान उनके वार्षिक कारोबार के आधार पर लिया जाए या कामगारों को किए जाने वाले भुगतान के प्रतिशत के आधार पर।


अंशदान के विकल्प और उनके प्रभाव

विश्लेषकों और उद्योग के जानकारों का मानना है कि कंपनियों के वार्षिक कारोबार के बजाय प्रति लेनदेन या कामगारों के भुगतान से जुड़ा अंशदान अर्थव्यवस्था पर असमान वित्तीय बोझ डाल सकता है। इसका सबसे अधिक प्रभाव उन क्षेत्रों पर पड़ेगा, जहां लेनदेन की संख्या अधिक है लेकिन मूल्य कम है।


सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020

सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के तहत एग्रीगेटर कंपनियों के लिए गिग और ऑनलाइन प्लेटफार्मों पर काम करने वाले श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा कोष में अंशदान देना अनिवार्य है। नियमों के अनुसार, किसी एक एग्रीगेटर के साथ वित्त वर्ष में 90 दिन या कई एग्रीगेटर कंपनियों के साथ कुल 120 दिन काम करने के बाद गिग श्रमिक इस योजना के तहत लाभ पाने के लिए पात्र हो जाते हैं।


अंशदान की गणना और उसके प्रभाव

एग्रीगेटर कंपनियों को अपने वार्षिक अंशदान का आकलन कर उसे हर साल जमा करना होता है। श्रम और रोजगार मंत्रालय प्रति लेनदेन या भुगतान पर आधारित अंशदान व्यवस्था को मानक बनाने पर विचार कर रहा है। यह चयन महत्वपूर्ण है क्योंकि लेनदेन की संख्या, सेवाओं के मूल्य, व्यावसायिक मॉडल और कुल कारोबार के आधार पर विभिन्न प्लेटफार्मों पर इसका प्रभाव भिन्न हो सकता है।


भुगतान आधारित व्यवस्था का प्रभाव

विश्लेषकों का मानना है कि दोनों व्यवस्थाओं की तुलना से यह स्पष्ट होता है कि भुगतान आधारित व्यवस्था राइड-हेलिंग जैसे अत्यधिक आवागमन वाले व्यवसायों पर भारी बोझ डाल सकती है। संहिता की धारा 114(4) के तहत एग्रीगेटर को अपने वार्षिक कारोबार का एक से दो प्रतिशत अंशदान देना होगा, लेकिन यह राशि गिग और प्लेटफार्म श्रमिकों को किए जाने वाले कुल भुगतान के पांच प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती। मंत्रालय सीधे कामगारों के भुगतान पर आधारित फॉर्मूले पर भी विचार कर रहा है।