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भारत में गोल्ड लोन का बढ़ता चलन: दक्षिण भारतीय राज्यों की प्रमुखता

केंद्र सरकार ने बताया है कि गोल्ड लोन लेने में दक्षिण भारतीय राज्य सबसे आगे हैं, जिसमें तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश प्रमुख हैं। गोल्ड लोन की बढ़ती मांग से यह स्पष्ट होता है कि यह क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। जानें कि कैसे यह लोन ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे व्यवसायियों को औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से जोड़ रहा है और इसके पीछे के कारण क्या हैं। क्या यह चलन अर्थव्यवस्था के लिए खतरा है? जानने के लिए पढ़ें पूरा लेख।
 

गोल्ड लोन में दक्षिण भारत की बढ़त

केंद्र सरकार ने लोकसभा में जानकारी दी है कि देश में गोल्ड लोन लेने में दक्षिण भारतीय राज्य सबसे आगे हैं। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के आंकड़ों के अनुसार, 31 मार्च 2026 तक तमिलनाडु में लगभग 4.12 लाख करोड़ रुपये का गोल्ड लोन था। इसके बाद आंध्र प्रदेश का स्थान है, जहां यह आंकड़ा 2.23 लाख करोड़ रुपये है। तेलंगाना का हिस्सा लगभग 92 हजार करोड़ रुपये रहा।


राज्यवार आंकड़े और गोल्ड लोन का वितरण

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) पूरे देश का राज्यवार आंकड़ा नहीं रखता है, इसलिए केवल सरकारी बैंकों के आंकड़े प्रस्तुत किए गए हैं। दक्षिण भारत के राज्य गोल्ड लोन लेने में अन्य राज्यों की तुलना में काफी आगे हैं। कुल गोल्ड लोन का 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा केवल पांच दक्षिण भारतीय राज्यों से आता है।


वित्त राज्य मंत्री का बयान

सांसद सीएम रमेश के प्रश्न के उत्तर में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि देश में गोल्ड लोन का एक बड़ा हिस्सा केवल पांच राज्यों में केंद्रित है, जिनमें से अधिकांश दक्षिण भारत के हैं।


क्या गोल्ड लोन का बढ़ता चलन अर्थव्यवस्था के लिए खतरा है?

गोल्ड लोन में तेजी से वृद्धि हुई है, लेकिन रिजर्व बैंक ने इसे वित्तीय स्थिरता के लिए बड़ा खतरा नहीं माना है। सोने की कीमतों में वृद्धि के कारण कर्ज में इजाफा हुआ है। बैंकों और नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFC) ने लोन-टू-वैल्यू अनुपात को कम रखा है, जिससे सुरक्षा में वृद्धि हुई है।


कर्ज लेने वाले कौन हैं?

गोल्ड लोन गांवों, छोटे व्यवसायियों और नए ग्राहकों को औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से जोड़ने में मदद कर रहा है, अन्यथा कई लोग सूदखोरों के चक्कर में पड़ सकते थे। यह लोन एक बड़े तबके की आवश्यकताओं को पूरा कर रहा है।


लोग किस प्रकार के कर्ज ले रहे हैं?

केंद्र सरकार ने संसद में बताया है कि सबसे अधिक कर्ज हाउसिंग लोन के लिए लिया जाता है। इसके बाद व्यक्तिगत लोन और वाहन लोन का स्थान है। गोल्ड लोन इस सूची में शामिल नहीं है।


क्या गोल्ड लोन बैंकों के लिए घाटे का सौदा है?

गोल्ड लोन में बैंकों और NBFC के लिए जोखिम नहीं बढ़ रहा है, बल्कि यह पहले से अधिक सुरक्षित और मजबूत हो गया है। नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPA) लगातार घट रहे हैं। मार्च 2023 में हर 100 रुपये के गोल्ड लोन पर लगभग 2.32 रुपये का डूबने का खतरा था, जो मार्च 2026 में घटकर 0.81 रुपये के आसपास आ गया। बैंकों के लिए यह जोखिम पहले से ही 0.19 प्रतिशत था, जो 2026 में घटकर 0.12 प्रतिशत हो जाएगा।


राज्यों में गोल्ड लोन का वितरण



दक्षिण भारतीय राज्यों में गोल्ड लोन की अधिकता का कारण क्या है?


सूरज शुक्ला, एक प्राइवेट फाइनेंसिंग कंपनी से जुड़े हैं। उन्होंने बताया कि गोल्ड लोन आसानी से मिल जाता है। किसान क्रेडिट कार्ड या व्यक्तिगत लोन के लिए कई प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है, जबकि गोल्ड लोन के लिए यह प्रक्रिया सरल होती है। दक्षिण भारत के लोगों के पास उत्तर भारतीयों की तुलना में अधिक सोना होता है। धार्मिक आयोजनों में सोना पहनने की परंपरा के कारण, वहां गोल्ड लोन की अधिकता कोई आश्चर्य की बात नहीं है।


बैंकों द्वारा गोल्ड लोन देने की प्रक्रिया

सोने की बढ़ती कीमतें और घटता लोन-टू-वैल्यू (LTV) अनुपात पर कर्ज दिया जाता है। इसका अर्थ है कि आप जो सोना बैंक के सामने गिरवी रख रहे हैं, उसके बाजार मूल्य के मुकाबले बैंक आपको कितना लोन दे रहा है। जब सोने के दाम बढ़ते हैं और LTV घटता है, तो इसका मतलब है कि कर्जदाता अब सोने की कुल कीमत के मुकाबले कम अनुपात में लोन दे रहे हैं।


सूरज शुक्ला ने समझाया कि यदि आपके पास 1 लाख रुपये का सोना है और बैंक उस पर 75,000 रुपये लोन देने की बजाय 60,000 रुपये का लोन दे रहा है, तो इसका मतलब है कि बैंक का LTV घट गया है। इससे यदि कोई ग्राहक लोन नहीं चुकाता है, तो बैंक उस सोने को नीलाम करके अपना पूरा पैसा आसानी से वसूल कर सकता है।