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भारत में चावल उत्पादन में प्रगति: खाद्य प्रसंस्करण मंत्री का बयान

खाद्य प्रसंस्करण मंत्री चिराग पासवान ने चावल उत्पादन में भारत की प्रगति पर प्रकाश डाला है। उन्होंने कहा कि अब हमें मात्रा के बजाय मूल्य पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। पासवान ने चावल की मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने के लिए पर्यावरण अनुकूल तरीकों और नवोन्मेष पर जोर दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री के 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र की भूमिका को भी रेखांकित किया।
 

चावल उत्पादन में नई चुनौतियाँ

खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के मंत्री चिराग पासवान ने शुक्रवार को बताया कि भारत ने चावल उत्पादन में महत्वपूर्ण प्रगति की है। हालांकि, अब हमें मात्रा के बजाय मूल्य पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है। उन्होंने भारतीय चावल निर्यातक परिसंघ (आईआरईएफ) और अपीडा द्वारा आयोजित भारत अंतरराष्ट्रीय चावल सम्मेलन (बीआईआरसी) के दूसरे संस्करण में यह बात कही। पासवान ने कहा कि धान की खेती से लेकर खाने की मेज तक चावल की मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने के लिए कई अवसर मौजूद हैं।


उन्होंने यह भी कहा कि पर्यावरण के अनुकूल तरीकों, गुणवत्ता प्रमाणन, अनुसंधान, नवोन्मेष और प्रसंस्कृत चावल उत्पादों पर ध्यान देने की आवश्यकता है।


पासवान ने स्वतंत्रता के बाद खाद्य सुरक्षा और उत्पादन को प्राथमिकता देने की बात करते हुए कहा कि हरित क्रांति ने भारत को खाद्यान्न की कमी से उबरने में मदद की। अब, हमें प्रसंस्करण, गुणवत्ता, ब्रांडिंग, स्थिरता और मूल्य संवर्धन पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री के 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।


उन्होंने बताया कि कुछ क्षेत्रों ने अपनी विकास क्षमता की सीमा को छू लिया है, जबकि खाद्य प्रसंस्करण और इससे जुड़े क्षेत्रों में अभी भी बहुत संभावनाएँ हैं। प्रधानमंत्री का उद्देश्य भारत को वैश्विक खाद्य जरूरतों को पूरा करने में एक प्रमुख देश बनाना है। इसके तहत भारत न केवल अपनी खाद्य आवश्यकताओं को पूरा करेगा, बल्कि वैश्विक खाद्य सुरक्षा में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा।


पासवान ने कहा कि इस महत्वाकांक्षा के केंद्र में चावल होगा और खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय प्रसंस्करण बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, नवोन्मेष को बढ़ावा देने और मूल्य वर्धित निर्यात को बढ़ाने के लिए योजनाएँ बना रहा है। उन्होंने बताया कि भारत विश्व के सबसे बड़े चावल निर्यातकों में से एक है, जिसकी वैश्विक चावल व्यापार में लगभग 40 प्रतिशत हिस्सेदारी है।


उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि भागीदार देशों के साथ भारत की ताकत साझा करते हुए निर्यात को कैसे बढ़ाया जाए, गुणवत्ता में सुधार कैसे किया जाए और वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं को कैसे अपनाया जाए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लाल किले से स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में राष्ट्रीय विकास के लिए रेखांकित की गई सप्तधारा को याद करते हुए पासवान ने कहा कि विनिर्माण और कृषि, विशेष रूप से चावल क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि चावल मूल्य श्रृंखला के लिए अधिक मशीनरी, उपकरण और तकनीक को घरेलू स्तर पर विकसित किया जाना चाहिए।