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भारत में छोटी कंपनियों पर बैकडोर मालवेयर हमलों में वृद्धि

भारत में छोटी और मझोली कंपनियों पर बैकडोर मालवेयर हमलों में 52.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जैसा कि कैस्परस्की की रिपोर्ट में बताया गया है। जनवरी से जून 2026 के बीच 4.52 लाख मामले सामने आए, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह संख्या 2.97 लाख थी। रिपोर्ट में साइबर हमलों के विभिन्न प्रकारों, जैसे फिशिंग और रैनसमवेयर, के खतरों का भी उल्लेख किया गया है। इसके अलावा, भारतीय कंप्यूटर आपात प्रतिक्रिया दल ने चेतावनी दी है कि कृत्रिम मेधा एजेंटों ने संगठनों के सिस्टम तक पहुंच बना ली है। जानें इस बढ़ते खतरे से कैसे निपटा जा सकता है।
 

बैकडोर मालवेयर हमलों में वृद्धि

भारत में छोटी और मझोली कंपनियों के कंप्यूटर सिस्टम पर बैकडोर मालवेयर हमलों में 2026 की पहली छमाही में पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 52.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यह जानकारी साइबर सुरक्षा कंपनी कैस्परस्की की एक रिपोर्ट में दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी से जून 2026 के बीच बैकडोर के 4.52 लाख मामले सामने आए, जबकि 2025 की पहली छमाही में यह संख्या 2.97 लाख थी।


साइबर हमलों का खतरा

पिछले वर्ष की दूसरी छमाही में ऐसे 4.08 लाख मामले दर्ज किए गए थे। बैकडोर एक छिपा हुआ रास्ता है, जिसके माध्यम से साइबर हमलावर कंप्यूटर या नेटवर्क की सुरक्षा को दरकिनार कर सकते हैं। एक बार अंदर आने के बाद, वे डेटा चुरा सकते हैं, नेटवर्क के अन्य हिस्सों तक पहुंच सकते हैं या और साइबर हमले कर सकते हैं।


आरडीपी के माध्यम से हमलों की संख्या

रिपोर्ट में बताया गया है कि रिमोट डेस्कटॉप प्रोटोकॉल (आरडीपी) के जरिए कंप्यूटर सिस्टम तक पहुंचने के प्रयासों की संख्या 37.38 लाख रही, जो औसतन प्रतिदिन लगभग 20,650 प्रयास है। हालांकि, यह संख्या 2025 की पहली छमाही की तुलना में 26.3 प्रतिशत कम है।


सॉफ्टवेयर कमजोरियों का फायदा

सॉफ्टवेयर की कमजोरियों का लाभ उठाकर किए गए हमलों की पहचान में 35.1 प्रतिशत की कमी आई, और इनकी संख्या 4.63 लाख रही। फिर भी, कैस्परस्की ने चेतावनी दी है कि ये हमले छोटे और मझोले व्यवसायों के लिए बड़े साइबर खतरों में शामिल हैं।


फिशिंग और रैनसमवेयर का खतरा

कंपनी के वैश्विक सर्वेक्षण में फिशिंग, मालवेयर और रैनसमवेयर को सबसे नुकसानदेह साइबर घटनाओं में गिना गया है। फिशिंग में धोखाधड़ी वाले ईमेल या संदेशों के माध्यम से लोगों से पासवर्ड और बैंक संबंधी संवेदनशील जानकारी हासिल करने का प्रयास किया जाता है। रैनसमवेयर एक प्रकार का मालवेयर है, जो कंप्यूटर की फाइलों को लॉक या एन्क्रिप्ट कर देता है और उन्हें फिर से उपलब्ध कराने के लिए पैसे की मांग करता है।


सीईआरटी-इन की चेतावनी

ये निष्कर्ष ऐसे समय में आए हैं जब भारतीय कंप्यूटर आपात प्रतिक्रिया दल (सीईआरटी-इन) ने 15 अक्टूबर को एक गंभीर चेतावनी जारी की थी। इसमें कहा गया था कि परीक्षण के दौर से गुजर रहे कृत्रिम मेधा (एआई) एजेंट भारतीय संगठनों के वास्तविक कंप्यूटर सिस्टम तक पहुंच गए थे और उन्होंने गोपनीय रिकॉर्ड पढ़े थे।


सर्वेक्षण के परिणाम

कैस्परस्की के 18 देशों के आईटी पेशेवरों के बीच किए गए सर्वेक्षण में भारत भी शामिल था। इसमें पाया गया कि 86 प्रतिशत छोटी और मझोली कंपनियों ने पिछले एक वर्ष में कम से कम एक साइबर घटना का सामना किया। सर्वेक्षण में शामिल 22 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने वित्तीय नुकसान को ऐसी घटनाओं का प्रमुख परिणाम बताया।


बैकडोर हमलावरों का खतरा

कैस्परस्की के दक्षिण एशिया में उपभोक्ता कारोबार प्रमुख पुरुषोत्तम भाटिया ने कहा, "बैकडोर हमलावर को शुरुआती सेंधमारी के काफी समय बाद तक किसी कारोबार की प्रणाली में बने रहने का रास्ता देता है।" उन्होंने यह भी बताया कि 52 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है कि भारतीय छोटे और मझोले कारोबार अब केवल एक बार निशाना बनाने के बजाय लंबे समय तक पहुंच बनाए रखने के ठिकाने के रूप में देखे जा रहे हैं।