भारत में जल्द ही 10 और 20 रुपये के पॉलीमर नोट: जानें इसके फायदे और ट्रायल प्रक्रिया
पॉलीमर नोटों का आगाज़
नई दिल्ली: भारत में 10 और 20 रुपये के पॉलीमर नोट जल्द ही देखने को मिल सकते हैं। केंद्र सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए इन नोटों के फील्ड ट्रायल की अनुमति दी है। यह योजना लगभग 14 साल पहले शुरू की गई थी, जिसे अब फिर से आगे बढ़ाया जा रहा है। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा कागजी नोटों का चलन जारी रहेगा। इस प्रकार, कागजी और पॉलीमर दोनों प्रकार के नोट एक साथ उपयोग में रहेंगे।
100 करोड़ नोटों का परीक्षण
सरकार के अनुसार, आरबीआई ने 10 रुपये और 20 रुपये के 100-100 करोड़ पॉलीमर नोट छापने का प्रस्ताव रखा है। इन नोटों के फील्ड ट्रायल के दौरान उनकी गुणवत्ता, टिकाऊपन और उपयोगिता का मूल्यांकन किया जाएगा। यदि परीक्षण सफल होता है, तो इन्हें भविष्य में नियमित रूप से चलन में लाया जा सकता है।
पॉलीमर नोटों की आवश्यकता
आरबीआई का मानना है कि छोटे मूल्यवर्ग के नोट अक्सर उपयोग में आते हैं और जल्दी खराब हो जाते हैं। पॉलीमर नोट कागजी नोटों की तुलना में 2 से 6 गुना अधिक समय तक टिक सकते हैं, जिससे नए नोट छापने की आवश्यकता कम होगी और रखरखाव की लागत में भी कमी आएगी।
पॉलीमर नोटों का इतिहास
दुनिया में सबसे पहले ऑस्ट्रेलिया ने 1988 में पॉलीमर नोट जारी किए थे। इसके बाद, ब्रिटेन, कनाडा, न्यूजीलैंड, सिंगापुर, मलेशिया, थाईलैंड और वियतनाम सहित 60 से अधिक देशों ने विभिन्न मूल्यवर्ग में प्लास्टिक नोटों को अपनाया है। कई देशों में इन नोटों को उनकी मजबूती और सुरक्षा के कारण सफल माना गया है।
पर्यावरण के लिए लाभदायक
विशेष प्लास्टिक फिल्म से बने पॉलीमर नोट पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद माने जाते हैं। इन्हें लंबे समय तक उपयोग किया जा सकता है और बाद में रीसाइक्लिंग करके अन्य प्लास्टिक उत्पाद बनाए जा सकते हैं। इससे कचरा कम होता है और संसाधनों की बचत होती है।
डिजिटल भुगतान पर प्रभाव नहीं
सरकार का कहना है कि पॉलीमर नोटों के आने से डिजिटल भुगतान प्रणाली पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। नकद और डिजिटल दोनों भुगतान प्रणाली एक-दूसरे के पूरक हैं और दोनों का उपयोग आगे भी जारी रहेगा।
नकदी की बढ़ती मांग
आरबीआई की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2026 तक देश में चलन में मौजूद कुल करेंसी का मूल्य 41.23 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा। यह पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 12 प्रतिशत अधिक है। इस संदर्भ में, टिकाऊ पॉलीमर नोटों का उपयोग नकदी प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।