भारत में जीएसटी संग्रह ने अप्रैल में बनाया नया रिकॉर्ड
अर्थव्यवस्था में सकारात्मक संकेत
भारत की अर्थव्यवस्था के लिए एक उत्साहजनक खबर आई है, जिसमें अप्रैल महीने में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह ने नया रिकॉर्ड स्थापित किया है। इस समय, जब पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा हुआ है, भारत में आर्थिक गतिविधियाँ फिर भी मजबूत बनी हुई हैं.
जीएसटी संग्रह का आंकड़ा
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल में कुल जीएसटी संग्रह 2.43 लाख करोड़ रुपये तक पहुँच गया, जो अब तक का सबसे ऊँचा स्तर है। यह पिछले वर्ष के इसी महीने में 2.23 लाख करोड़ रुपये के संग्रह की तुलना में लगभग 8.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है.
शुद्ध जीएसटी संग्रह
रिफंड घटाने के बाद, शुद्ध जीएसटी संग्रह 2.11 लाख करोड़ रुपये रहा, जो सालाना आधार पर 7.3 प्रतिशत अधिक है। अप्रैल में रिफंड का भुगतान भी तेजी से बढ़ा है, जो 19.3 प्रतिशत बढ़कर 31,793 करोड़ रुपये तक पहुँच गया है, जिससे शुद्ध राजस्व 2,10,909 करोड़ रुपये के आसपास दर्ज किया गया.
आयात से राजस्व में वृद्धि
जीएसटी संग्रह में वृद्धि का मुख्य कारण आयात से मिलने वाला राजस्व रहा है। आयात से संग्रह 25.8 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 57,580 करोड़ रुपये तक पहुँच गया, जबकि घरेलू लेन-देन से संग्रह 4.3 प्रतिशत बढ़कर 1.85 लाख करोड़ रुपये रहा.
अंतरराष्ट्रीय व्यापार का प्रभाव
आयात से मिलने वाला जीएसटी राजस्व 42.9 प्रतिशत तक बढ़ा है, जबकि घरेलू स्तर पर शुद्ध संग्रह में केवल 0.3 प्रतिशत की मामूली वृद्धि हुई है। यह स्पष्ट है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार और आयात गतिविधियाँ इस वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं.
पिछले महीने का प्रदर्शन
मार्च महीने में भी जीएसटी संग्रह मजबूत रहा, जहाँ शुद्ध संग्रह 1.78 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 8.2 प्रतिशत अधिक था. मार्च में कुल संग्रह 2 लाख करोड़ रुपये के पार चला गया था.
वित्त वर्ष 2025-26 का संग्रह
वित्त वर्ष 2025-26 में कुल जीएसटी संग्रह 22.27 लाख करोड़ रुपये रहा, जो सालाना आधार पर 8.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है. शुद्ध संग्रह 7.1 प्रतिशत बढ़कर 19.34 लाख करोड़ रुपये तक पहुँच गया है.
राज्यों का योगदान
महाराष्ट्र, कर्नाटक और गुजरात जैसे प्रमुख औद्योगिक राज्यों का जीएसटी संग्रह में सबसे अधिक योगदान है। विशेषज्ञों का मानना है कि ये आंकड़े देश में खपत, व्यापार और उत्पादन की स्थिरता को दर्शाते हैं, जो भविष्य में अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत माने जा रहे हैं.