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भारत में डेटा सेंटर क्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि की उम्मीद

भारत की डेटा सेंटर क्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि की उम्मीद है, जो 2025 में 2.2 गीगावाट से बढ़कर 2030 तक 12 गीगावाट तक पहुंच सकती है। वुड मैकेंजी की रिपोर्ट के अनुसार, एआई के बढ़ते उपयोग और डिजिटल अर्थव्यवस्था के विकास के चलते, निवेश के नए अवसर सामने आ रहे हैं। जानें इस क्षेत्र में बिजली की मांग, निवेश की संभावनाएं और चुनौतियों के बारे में।
 

भारत की डेटा सेंटर क्षमता में वृद्धि

नई दिल्ली, 27 जुलाई: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के बढ़ते उपयोग, विशाल क्लाउड अवसंरचना में निवेश और डिजिटल अर्थव्यवस्था के विकास के चलते, भारत की डेटा सेंटर क्षमता 2025 में 2.2 गीगावाट से बढ़कर 2030 तक 12 गीगावाट से अधिक होने की संभावना है। यह जानकारी सोमवार को एक रिपोर्ट में सामने आई। वुड मैकेंजी द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट के अनुसार, एआई के लिए समर्पित डेटा सेंटर क्षमता 2025 में 275 मेगावाट से बढ़कर 2030 तक 6,546 मेगावाट तक पहुंचने का अनुमान है.


बिजली की मांग और निवेश के अवसर

इसके अलावा, डेटा सेंटर की बिजली की मांग 2025 में 10 टेरावाट-घंटे (टीडब्ल्यूएच) से बढ़कर 2040 तक 191 टेरावाट-घंटे तक पहुंचने की उम्मीद है। वुड मैकेंजी के शोध सहयोगी सौहार्द पाल ने कहा, "भारत का डेटा सेंटर बाजार दीर्घकालिक निवेश के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर बन रहा है। बड़े पैमाने पर पूंजी निवेश, एआई आधारित कार्यभार में वृद्धि और पिछले एक दशक के नीतिगत समर्थन ने भारत को एशिया-प्रशांत क्षेत्र के प्रमुख बाजारों के समकक्ष लाने में मदद की है।"


डिजिटल अर्थव्यवस्था का प्रभाव

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि 2025 में भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था का मूल्य 32 लाख करोड़ रुपये होगा, जो सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में लगभग 12 प्रतिशत योगदान देगा। देश में 103 करोड़ से अधिक सक्रिय इंटरनेट उपयोगकर्ता हैं और हर महीने लगभग 2,200 करोड़ यूपीआई लेनदेन होते हैं। भारत का घरेलू एआई बाजार 2032 तक 11.7 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने की संभावना है।


भविष्य की संभावनाएं

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि वर्तमान में महाराष्ट्र और तमिलनाडु देश के कुल स्थापित सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) भार का लगभग 65 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं। हालांकि, भविष्य में आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक में निवेश में वृद्धि की संभावना है। ये उभरते बाजार वैश्विक स्तर की बड़ी क्लाउड सेवा कंपनियों से महत्वपूर्ण निवेश आकर्षित कर रहे हैं।


बिजली की उपलब्धता की चुनौती

इनमें अमेजन वेब सर्विसेज और गूगल के साथ-साथ घरेलू कंपनी अदाणीकॉननेक्स भी शामिल है, जिसने 2.6 गीगावाट क्षमता की विकास परियोजनाओं की घोषणा की है। रिपोर्ट के अनुसार, विश्वसनीय और प्रतिस्पर्धी दरों पर बिजली की उपलब्धता अब डेटा सेंटर उद्योग के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गई है।