भारत में डेटा सेंटर सेवाओं के लिए विदेशी कंपनियों के लिए नियमों में बदलाव
सरकार का नया प्रस्ताव
नई दिल्ली, चार अगस्त: भारतीय सरकार ने मंगलवार को विदेशी कंपनियों के लिए डेटा सेंटर सेवाओं के अनुपालन संबंधी आवश्यकताओं को सरल बनाने के लिए कुछ संरचनात्मक बदलावों का प्रस्ताव रखा है। इस प्रस्ताव में अधिसूचना की अनिवार्यता को समाप्त करने का सुझाव दिया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य व्यापार की सुगमता को बढ़ावा देना है।
कराधान एवं अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026
लोकसभा में पेश किए गए कराधान एवं अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 में उन विदेशी कंपनियों के लिए सूचना उपलब्ध कराने की आवश्यकताओं को कम करने का प्रस्ताव है, जो वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में घोषित कर अवकाश का लाभ उठाना चाहती हैं। इससे डेटा सेंटर के संचालन में आसानी होगी। सरकार ने 2026-27 के बजट में यह घोषणा की थी कि भारत में डेटा सेंटर सेवाएं लेने वाली विदेशी कंपनियों को वर्ष 2047 तक 20 वर्षों का कर अवकाश मिलेगा।
कर व्यवस्था में समानता
इस पहल का उद्देश्य विदेशी कंपनियों की चिंता को दूर करना है कि उनकी वैश्विक आय पर भारतीय कर अधिकारियों द्वारा कर लगाया जा सकता है। बजट में यह स्पष्ट किया गया था कि चाहे कोई वैश्विक कंपनी भारत में डेटा सेंटर स्थापित करे या भारतीय डेटा सेंटर से सेवाएं प्राप्त करे, कर व्यवस्था समान होगी। इससे सभी कंपनियों को समान अवसर मिलेंगे।
नियमों में बदलाव
सरकार ने कारोबार की सुगमता के लिए कराधान एवं अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 के माध्यम से विदेशी कंपनियों को केंद्र सरकार से अलग से अधिसूचित कराने की आवश्यकता को समाप्त करने का प्रस्ताव रखा है। इसके अलावा, केंद्र सरकार द्वारा निर्दिष्ट डेटा सेंटर को अधिसूचित करने की शर्त भी हटाने का सुझाव दिया गया है। वित्त मंत्रालय के एक सूत्र ने बताया कि इस प्रक्रिया से कई मंजूरी संबंधी चरणों को पूरी तरह से हटा दिया गया है।
आवश्यक जानकारी का प्रावधान
आयकर विभाग ने अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों (एफएक्यू) में कहा कि क्लाउड सेवाएं देने वाली विदेशी कंपनियों और डेटा सेंटर सेवाएं प्रदान करने वाली भारतीय कंपनियों को नियमों के तहत आवश्यक जानकारी निर्धारित प्रारूप में उपलब्ध करानी होगी।
पट्टा मॉडल की अनुमति
विधेयक में यह भी प्रावधान किया गया है कि यदि कोई निर्दिष्ट डेटा सेंटर भारतीय कंपनी द्वारा संचालित किया जाता है, तो उसके लिए पट्टा मॉडल के तहत स्वामित्व की अनुमति होगी। एफएक्यू में कहा गया है कि विभिन्न पक्षों ने सरकार को बताया था कि निर्दिष्ट डेटा सेंटर का भारतीय कंपनी के स्वामित्व में होना कुछ मामलों में प्रतिबंधात्मक हो सकता है।
भविष्य की संभावनाएं
इसलिए, प्रावधानों में संशोधन कर पट्टा मॉडल के तहत संचालन की अनुमति दी गई है। कुल मिलाकर, प्रस्तावित विधेयक इन मंजूरी संबंधी आवश्यकताओं को समाप्त करता है और भारतीय डेटा सेंटर को केवल प्रत्यक्ष स्वामित्व के बजाय पट्टे के आधार पर संचालित करने की अनुमति देता है। सूत्रों का कहना है कि इसका परिणाम यह होगा कि वैश्विक क्लाउड कंपनियों को सेवाएं देने वाले भारतीय डेटा सेंटर का परिवेश और भी मजबूत होगा।
निवेश के अवसर
इस सुधार से भारत को बड़े 'एआई डेटा सिटी' विकसित करने और उनमें महत्वपूर्ण निवेश आकर्षित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।