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भारत में तंबाकू उत्पादों पर नई कर प्रणाली: क्या बढ़ेंगी कीमतें?

भारत सरकार ने तंबाकू उत्पादों पर नई कर प्रणाली लागू की है, जो 1 फरवरी 2026 से प्रभावी होगी। इस प्रणाली के तहत सिगरेट और अन्य तंबाकू सामान पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लगाया जाएगा, जिससे कीमतों में वृद्धि हो सकती है। यह बदलाव लगभग 10 करोड़ धूम्रपान करने वालों को प्रभावित करेगा। जानें इस नई व्यवस्था का शेयर बाजार पर क्या असर पड़ा है और इससे धूम्रपान की आदतों में क्या बदलाव आ सकता है।
 

तंबाकू उत्पादों पर नई कर प्रणाली का आगाज़


भारत सरकार ने तंबाकू उत्पादों पर एक नई कर प्रणाली लागू करने का निर्णय लिया है। 1 फरवरी 2026 से सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लगाया जाएगा, जिससे इनकी कीमतों में वृद्धि हो सकती है। इस बदलाव का प्रभाव लगभग 10 करोड़ धूम्रपान करने वालों पर पड़ेगा। यह नई व्यवस्था जीएसटी मुआवजा उपकर को समाप्त कर लागू की जा रही है।


नई कर प्रणाली की विशेषताएँ

वित्त मंत्रालय ने 31 दिसंबर 2025 को इस नई कर प्रणाली की अधिसूचना जारी की। इसके अनुसार, सिगरेट की लंबाई के आधार पर प्रति हजार स्टिक पर 2,050 से 8,500 रुपये तक का उत्पाद शुल्क लगाया जाएगा। यह शुल्क मौजूदा 40 प्रतिशत जीएसटी के अतिरिक्त होगा। पान मसाला पर स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर लागू होगा, जबकि बीड़ी पर केवल 18 प्रतिशत जीएसटी रहेगा।


यह बदलाव दिसंबर 2025 में संसद द्वारा पारित दो विधेयकों के बाद किया गया है। पहले का जीएसटी मुआवजा उपकर विभिन्न दरों पर लागू होता था, लेकिन अब इसे समाप्त कर नई प्रणाली शुरू की गई है। सरकार का उद्देश्य तंबाकू की खपत को कम करना और राजस्व को बनाए रखना है।


शेयर बाजार पर प्रभाव

इस नई घोषणा के बाद तंबाकू कंपनियों के शेयरों में गिरावट आई है। बाजार की प्रमुख कंपनी आईटीसी के शेयरों में 4 प्रतिशत से अधिक की कमी आई है। गॉडफ्रे फिलिप्स इंडिया, जो मार्लबोरो सिगरेट का उत्पादन करती है, के शेयर 7-8 प्रतिशत तक गिरे हैं। निफ्टी एफएमसीजी इंडेक्स भी नीचे आया है। विश्लेषकों का मानना है कि कंपनियां कीमतें बढ़ा सकती हैं, जिससे बिक्री पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। लंबी सिगरेट पर अधिक बोझ पड़ेगा।


कीमतों में वृद्धि का संभावित प्रभाव

भारत में तंबाकू से संबंधित बीमारियाँ एक गंभीर खतरा हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन की सलाह है कि तंबाकू पर कुल कर रिटेल कीमत का 75 प्रतिशत होना चाहिए, जबकि वर्तमान में यह लगभग 53 प्रतिशत है। नई कर प्रणाली से कीमतों में वृद्धि होने पर धूम्रपान की आदत में कमी आ सकती है। इससे सरकार को बेहतर राजस्व प्राप्त होगा, जिसे स्वास्थ्य कार्यक्रमों और अन्य योजनाओं में निवेश किया जाएगा। हालांकि, सस्ते विकल्प जैसे बीड़ी की खपत में वृद्धि हो सकती है।