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भारत में थोक महंगाई में मामूली गिरावट, खुदरा महंगाई में बढ़ोतरी

भारत में थोक महंगाई दर में जुलाई 2026 में मामूली गिरावट आई है, जो 9.78 प्रतिशत पर पहुंच गई है। हालांकि, खुदरा महंगाई दर बढ़कर 4.45 प्रतिशत हो गई है। ईंधन और ऊर्जा की कीमतों में कमी से राहत मिली है, लेकिन खाद्य वस्तुओं की कीमतें बढ़ती जा रही हैं। जानें इस स्थिति के पीछे के कारण और इसके प्रभावों के बारे में।
 

थोक महंगाई में राहत की खबर

नई दिल्ली। आज शुक्रवार को भारत में थोक महंगाई दर में थोड़ी राहत मिली है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2026 में थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित महंगाई दर 9.78 प्रतिशत पर आ गई है, जो कि पिछले महीने जून में 9.87 प्रतिशत के उच्चतम स्तर से कम है। हालांकि, खाद्य पदार्थों और विनिर्मित उत्पादों की बढ़ती कीमतों ने आम जनता के बजट पर असर डाला है।


महंगाई दर में गिरावट के बावजूद खाद्य कीमतों में वृद्धि

जुलाई 2026 के आर्थिक आंकड़ों के अनुसार, थोक महंगाई दर में कमी आई है, जिसमें फ्यूल और पावर क्षेत्र में सबसे अधिक राहत मिली है। इस क्षेत्र की महंगाई दर जून के 27.41 प्रतिशत से घटकर 20.05 प्रतिशत हो गई है। हालांकि, प्राइमरी आर्टिकल्स की महंगाई दर 7.00 प्रतिशत से बढ़कर 8.52 प्रतिशत हो गई है, और मैन्युफैक्चरिंग प्रोडक्ट्स की महंगाई भी बढ़कर 8.29 प्रतिशत हो गई है। इसके विपरीत, खुदरा महंगाई दर जून के 4.38 प्रतिशत से बढ़कर 4.45 प्रतिशत पर पहुंच गई है।


ईंधन और ऊर्जा में राहत

जुलाई के आंकड़ों में ईंधन और ऊर्जा क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है। वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव के कारण ईंधन और बिजली की महंगाई दर 20.05 प्रतिशत पर आ गई है। इससे माल ढुलाई और परिवहन लागत में कमी आने की उम्मीद है।


खाद्य वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि का कारण

हालांकि मुख्य सूचकांक में गिरावट आई है, लेकिन खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेजी बनी हुई है। असमान मानसून और कुछ राज्यों में खराब मौसम के कारण सब्जियों और अन्य जल्दी खराब होने वाले सामानों की आपूर्ति प्रभावित हुई है। थोक खाद्य सूचकांक 6.14 प्रतिशत से बढ़कर 6.65 प्रतिशत हो गया है, जिससे खुदरा बाजारों में कीमतें बढ़ रही हैं। इसके अलावा, निर्मित खाद्य उत्पादों की महंगाई भी बढ़कर 8.89 प्रतिशत हो गई है।