×

भारत में थोक महंगाई में वृद्धि: सितंबर में 10% के पार जाने की संभावना

भारत में थोक महंगाई दर में लगातार वृद्धि हो रही है, जो अगस्त में 9.92% तक पहुँच गई है। कच्चे तेल और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि इसके मुख्य कारण हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सितंबर में यह दर 10% के पार जा सकती है। जानें इस महंगाई के पीछे के कारण और इसके संभावित प्रभावों के बारे में।
 

महंगाई की चिंताएँ बढ़ती जा रही हैं


भारत में थोक महंगाई दर में लगातार वृद्धि हो रही है। अगस्त में Wholesale Price Index (WPI) आधारित महंगाई जुलाई के 9.78% से बढ़कर 9.92% तक पहुँच गई है। कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि इसके मुख्य कारण हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सितंबर में स्थिति और बिगड़ सकती है।


ऊर्जा की कीमतों का महंगाई पर प्रभाव

अगस्त में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की महंगाई 34.41% तक पहुँच गई, जो जुलाई में 26.99% थी। इसके परिणामस्वरूप ईंधन और बिजली की महंगाई भी 20.05% से बढ़कर 22.93% हो गई। पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव ने ऊर्जा बाजार पर दबाव डाला है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक संकट का स्थायी समाधान नहीं निकलता, तब तक कीमतों पर इसका प्रभाव बना रह सकता है।


खाद्य महंगाई का उच्चतम स्तर

खाद्य वस्तुओं की थोक महंगाई अगस्त में 7% से ऊपर पहुँच गई, जो पिछले 20 महीनों में सबसे ऊँचा स्तर है। जुलाई में यह 6.6% थी। फल-सब्जियों, दूध, मसालों और चीनी की कीमतों में वृद्धि ने खाद्य महंगाई को बढ़ावा दिया है। हालांकि, गैर-खाद्य उत्पादों में महंगाई की दर कुछ कम रही, जिससे कुल WPI में बहुत अधिक वृद्धि नहीं हुई।


सितंबर में WPI 10% के पार जा सकती है

विशेषज्ञों के अनुसार, सितंबर में थोक महंगाई दोहरे अंकों में पहुँच सकती है। India Ratings के मुख्य अर्थशास्त्री देवेंद्र पंत ने WPI महंगाई का अनुमान 10.2% लगाया है। उनका कहना है कि पश्चिम एशिया संकट, कमजोर बारिश और मुद्रा की कमजोरी के कारण कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। 2026 के शेष भाग में भी महंगाई ऊँची रह सकती है।


खुदरा बाजार पर महंगाई का प्रभाव

थोक स्तर पर बढ़ती लागत का असर खुदरा बाजार में भी दिखाई दे सकता है, क्योंकि व्यापारी इनपुट लागत बढ़ने पर उसका कुछ हिस्सा ग्राहकों तक पहुँचाते हैं। जुलाई में खुदरा महंगाई 4.45% रही, जो पिछले 19 महीनों का उच्चतम स्तर था। अगस्त में कोर WPI मामूली घटकर 8.1% रही, लेकिन रसायन और धातु समेत 21 में से सात क्षेत्रों में महंगाई दोहरे अंकों में रही। RBI ने भी पश्चिम एशिया संकट, तेल की कीमतों और कमजोर बारिश को महंगाई के लिए जोखिम बताया है।