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भारत में दूध उत्पादन में अभूतपूर्व वृद्धि: 2025 तक 24.7 करोड़ टन तक पहुंचने की उम्मीद

भारत में दूध उत्पादन में अभूतपूर्व वृद्धि हो रही है, जो 1950 में 1.7 करोड़ टन से बढ़कर 2025 में 24.7 करोड़ टन तक पहुंचने की उम्मीद है। इस क्षेत्र में डेयरी का योगदान 65 प्रतिशत है, जो देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। केंद्रीय बजट में पशुपालन के लिए 6,153 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे पशु चिकित्सकों की नियुक्ति और सहकारी संस्थाओं को सहायता मिलेगी। जानें इस क्षेत्र की वर्तमान स्थिति और भविष्य की संभावनाएं।
 

दूध उत्पादन में वृद्धि का आंकड़ा

कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग के सचिव और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक, एम एल जाट ने बताया कि भारत में दूध उत्पादन 1950 में 1.7 करोड़ टन से बढ़कर 2025 में 24.7 करोड़ टन तक पहुंचने की संभावना है।


जाट ने कहा कि 17.25 लाख करोड़ रुपये के पशुधन क्षेत्र में डेयरी का प्रमुख स्थान है, जो कुल उत्पादन में 65 प्रतिशत का योगदान देता है। यह क्षेत्र देश के सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) में 16 प्रतिशत की हिस्सेदारी रखता है, जिससे 46.1 प्रतिशत जनसंख्या को आजीविका मिलती है।


केंद्रीय बजट में पशुपालन के लिए प्रावधान

हरियाणा के करनाल में आईसीएआर-राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान के 22वें दीक्षांत समारोह में बोलते हुए, जाट ने बताया कि केंद्रीय बजट में पशुपालन क्षेत्र के लिए 6,153 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 16 प्रतिशत अधिक है।


इस राशि का उपयोग 20,000 पशु चिकित्सकों की नियुक्ति, महाविद्यालयों और प्रयोगशालाओं को सहायता प्रदान करने और सहकारी संस्थाओं को कर राहत देने के लिए किया जाएगा।


एनडीआरआई द्वारा जारी एक बयान में जाट ने कहा कि दूध उत्पादन में उत्तर प्रदेश सबसे आगे है, जबकि उत्पादकता के मामले में पंजाब और हरियाणा शीर्ष स्थान पर हैं। नीति आयोग ने अनुमान लगाया है कि वर्ष 2047 तक दूध की मांग 48 से 60.6 करोड़ टन के बीच रह सकती है।