भारत में नए ईंधन दक्षता मानकों का प्रस्ताव: प्रदूषण कम करने की दिशा में बड़ा कदम
केंद्र सरकार का नया कदम
भारत में बढ़ते प्रदूषण और ईंधन की खपत को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। हाल ही में, सरकार ने यात्री वाहनों के लिए नए ईंधन दक्षता और कार्बन उत्सर्जन मानकों का मसौदा जारी किया है। इन नियमों को 1 अप्रैल 2027 से लागू करने की योजना है। वर्तमान में, सरकार ने सभी संबंधित पक्षों से 6 अगस्त तक सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की हैं।
नए नियमों का उद्देश्य
इन प्रस्तावित नियमों का मुख्य उद्देश्य वाहनों की ईंधन खपत को कम करना और पर्यावरण पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव को घटाना है। सरकार चाहती है कि वाहन निर्माता कंपनियां भविष्य में अधिक ईंधन दक्ष और कम प्रदूषण फैलाने वाले मॉडल पेश करें। इसके लिए मानकों को चरणबद्ध तरीके से सख्त करने का प्रस्ताव है।
ईंधन खपत और कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य
वर्तमान जानकारी के अनुसार, वर्ष 2027-28 में प्रति 100 किलोमीटर ईंधन खपत का लक्ष्य 3.996 लीटर रखा गया है। इसके बाद, वर्ष 2031-32 तक इसे घटाकर 3.327 लीटर प्रति 100 किलोमीटर करने का प्रस्ताव है। इसी समयावधि में कार्बन उत्सर्जन की सीमा को 94.76 ग्राम प्रति किलोमीटर से घटाकर 78.90 ग्राम प्रति किलोमीटर करने की योजना है।
नवीन ईंधनों को प्राथमिकता
यह पहली बार है जब सरकार ने इथेनॉल, संपीड़ित जैव गैस और अन्य जैव ईंधनों को विशेष महत्व देने का प्रस्ताव रखा है। यदि कोई वाहन निर्माता इन ईंधनों का उपयोग बढ़ाता है, तो उसे कार्बन उत्सर्जन के आकलन में विशेष छूट मिल सकेगी। इसका उद्देश्य स्वच्छ और नवीकरणीय ईंधनों के उपयोग को बढ़ावा देना है।
आधुनिक तकनीकों को प्रोत्साहन
प्रस्तावित मसौदे में यह भी उल्लेख किया गया है कि जिन कंपनियों के वाहन ईंधन बचाने वाली आधुनिक तकनीकों से लैस होंगे, उन्हें अतिरिक्त लाभ दिया जाएगा। ऐसी तकनीकों के आधार पर निर्धारित सीमा तक कार्बन उत्सर्जन में राहत का लाभ मिल सकेगा, जिससे वाहन निर्माता नई तकनीकों में निवेश के लिए प्रोत्साहित होंगे।
इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों को प्रोत्साहन
इलेक्ट्रिक वाहनों, बाहरी स्रोत से चार्ज होने वाले संकर वाहनों, और मजबूत हाइब्रिड वाहनों को भी विशेष प्रोत्साहन देने का प्रस्ताव है। इन वाहनों को औसत ईंधन खपत की गणना के दौरान अतिरिक्त लाभ मिलेगा, जिससे स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा मिल सकेगा।
नियमों के पालन का आकलन
एक महत्वपूर्ण बदलाव यह प्रस्तावित किया गया है कि नियमों के पालन का आकलन अब हर वर्ष के बजाय दो चरणों में किया जाएगा। पहला चरण तीन वर्ष का होगा, जबकि दूसरा चरण दो वर्ष का रहेगा। इससे वाहन कंपनियों को अपने उत्पादों और तकनीकों में सुधार के लिए अधिक समय मिलेगा।
वाहन उद्योग की प्रतिक्रिया
प्रस्तावित नियमों को लेकर वाहन उद्योग में विभिन्न राय सामने आ रही हैं। छोटे और बड़े वाहनों का निर्माण करने वाली कंपनियों के बीच इन मानकों को लेकर मतभेद भी देखने को मिल रहे हैं। हालांकि, सरकार का कहना है कि अंतिम नियम सभी सुझावों पर विचार करने के बाद ही तय किए जाएंगे।
विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ये नियम लागू होते हैं, तो इससे ईंधन की बचत, प्रदूषण में कमी और स्वच्छ ऊर्जा आधारित वाहनों को बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही, भारत पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े अपने दीर्घकालिक लक्ष्यों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ा सकेगा।