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भारत में नकली उत्पादों का बढ़ता संकट: स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा

भारत में नकली उत्पादों की समस्या तेजी से बढ़ रही है, जिससे स्वास्थ्य पर गंभीर खतरे उत्पन्न हो रहे हैं। हाल ही में की गई एक स्टडी में पता चला है कि 35 प्रतिशत ग्राहक नकली सामान खरीद चुके हैं। दिल्ली में कई फैक्ट्रियों से नकली खाद्य उत्पादों और दवाओं का भंडाफोड़ हुआ है। इस रिपोर्ट में नकली उत्पादों की बिक्री, उनके स्वास्थ्य पर प्रभाव और लोगों की जागरूकता की कमी पर चर्चा की गई है। जानें कैसे ये उत्पाद आपके जीवन को प्रभावित कर सकते हैं।
 

नकली उत्पादों की समस्या

जब आप किसी ब्रांड के नाम से सामान खरीदते हैं, तो यह उम्मीद करते हैं कि वह असली और लाभकारी होगा। ब्रांड का नाम, पैकेजिंग या प्रतिष्ठित दुकानों से खरीदने पर ग्राहकों को विश्वास होता है कि उत्पाद असली है। हाल के समय में कई घटनाएं सामने आई हैं, जैसे फर्जी टूथपेस्ट बनाने वाली फैक्ट्रियां और नकली इंजेक्शन। नकली मसाले, दवाएं, और हानिकारक खाद्य पदार्थ लोगों के विश्वास को तोड़ रहे हैं।


पकड़े जाने की दर

चौंकाने वाली बात यह है कि नकली उत्पाद बनाने वाले बहुत कम लोग पकड़े जा रहे हैं। कई मामलों में, ये लोग लंबे समय से काम कर रहे हैं और जब तक पकड़े जाते हैं, तब तक वे लाखों रुपये का सामान बेच चुके होते हैं। इन नकली उत्पादों में खाद्य सामग्री, दवाएं, कॉस्मेटिक्स और अन्य चीजें शामिल हैं, जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकती हैं।


स्टडी के निष्कर्ष

ऑथेंटिकेशन सॉल्यूशन प्रोवाइडर्स असोसिएशन और CRISIL इंटेलिजेंस द्वारा जारी रिपोर्ट 'स्टेट ऑफ काउंटफीटिंग इन इंडिया 2025' में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। यह रिपोर्ट बताती है कि नकली उत्पाद केवल दुकानों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ऑनलाइन मार्केटप्लेस पर भी धड़ल्ले से बिक रहे हैं। पिछले साल, भारत के लगभग 35 प्रतिशत ग्राहकों ने नकली सामान खरीदा। शहरी क्षेत्रों में, 89 प्रतिशत लोगों ने स्वीकार किया कि उन्होंने अपने जीवन में कम से कम एक बार नकली सामान खरीदा है।


नकली उत्पादों की बिक्री

इस अध्ययन में दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरु, हैदराबाद, अहमदाबाद, जयपुर और इंदौर के 1639 लोगों से बातचीत की गई। 31 प्रतिशत लोगों ने माना कि उन्होंने ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से खरीदे गए कपड़े नकली थे। इसी तरह, 27 प्रतिशत ने घरेलू उपयोग की चीजें जैसे खाद्य सामग्री और व्यक्तिगत उपयोग की वस्तुएं नकली पाई।


नकली खाद्य उत्पादों का मामला


दिल्ली में 21 अप्रैल को एक फैक्ट्री पकड़ी गई, जो ENO के नकली पैकेट और Nescafe की नकली कॉफी बना रही थी। पुलिस ने नकली कच्चा माल और फर्जी पैकेट बरामद किए। हाल ही में कंझावला में एक फैक्ट्री में सेंसोडाइन का नकली टूथपेस्ट तैयार किया जा रहा था।


मसालों में मिलावट

घरों में इस्तेमाल होने वाले मसाले अक्सर बाजार से खरीदे जाते हैं। कई बार लोग प्रसिद्ध ब्रांड के मसाले खरीदते हैं, लेकिन मिलावटखोर इसका फायदा उठाते हैं। मसालों में सस्ते केमिकल और अन्य हानिकारक चीजें मिलाने के मामले सामने आए हैं।


डेयरी उत्पादों में फर्जीवाड़ा

डेयरी उत्पादों में नकली चीजें सबसे ज्यादा पाई जाती हैं। हाल ही में राजस्थान में 1270 किलोग्राम बदबूदार खोया पकड़ा गया। नकली पनीर के मामले भी आम हो गए हैं, जैसे मेरठ में 28 क्विंटल नकली पनीर पकड़ा गया।


नकली दवाओं का खतरा

गुरुग्राम में फर्जी मौनजारो इंजेक्शन बनाने वाले गिरोह का भंडाफोड़ हुआ। यह गिरोह नकली इंजेक्शन बेच रहा था, जो स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है।


फर्जीवाड़े का आसान होना

विशेषज्ञों का कहना है कि यह फर्जीवाड़ा छोटे स्तर पर नहीं होता, बल्कि इसके पीछे एक पूरा सिस्टम काम करता है। फर्जी पैकेजिंग, नकली उत्पाद और अधिकारियों की मिलीभगत से यह काम आसान हो जाता है।


लोगों की जागरूकता

लोग अक्सर पैकेट पर लिखे ब्रांड के नाम और लोगो को देखकर मान लेते हैं कि उत्पाद असली है। यही कारण है कि नकली उत्पाद आसानी से बिक जाते हैं।