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भारत में नवीकरणीय ऊर्जा के लिए 92 गीगावाट घंटे की ऊर्जा भंडारण परियोजना को मिली मंजूरी

भारत सरकार ने नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण को बढ़ावा देने के लिए 92 गीगावाट घंटे की ऊर्जा भंडारण परियोजना को मंजूरी दी है। इस योजना के तहत 14,500 करोड़ रुपये का वित्तपोषण किया जाएगा, जिससे देश की ऊर्जा सुरक्षा में सुधार होगा। यह पहल न केवल घरेलू निर्माण को बढ़ावा देगी, बल्कि बिजली ग्रिड की स्थिरता को भी मजबूत करेगी। जानें इस महत्वाकांक्षी योजना के बारे में और कैसे यह भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करेगी।
 

नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण के लिए नई पहल

नई दिल्ली, चार नवंबर: सरकार ने बुधवार को देश में नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण को बढ़ावा देने के लिए 92 गीगावाट घंटे की ग्रिड-स्तरीय ऊर्जा भंडारण प्रणाली विकसित करने की योजना को 14,500 करोड़ रुपये के वित्तपोषण के साथ मंजूरी दी। यह योजना वित्त वर्ष 2030-31 तक चलेगी और इसमें 30 गीगावाट घंटे की बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली, 60 गीगावाट घंटे की पंप स्टोरेज परियोजनाएं और 2 गीगावाट घंटे की नई भंडारण तकनीकों को शामिल किया जाएगा। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में इस योजना के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी।


इस योजना के माध्यम से देशभर में 92 गीगावाट घंटे की नई ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित की जाएगी, जो मौजूदा ग्रिड-स्तरीय ऊर्जा भंडारण क्षमता से 170 प्रतिशत अधिक होगी। इसके अलावा, वित्त वर्ष 2031-32 तक 411 गीगावाट घंटे की आवश्यक ग्रिड-स्तरीय ऊर्जा भंडारण क्षमता हासिल करने में भी सहायता मिलेगी।


आधिकारिक बयान के अनुसार, यह योजना भारत के बिजली क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, बड़े पैमाने पर नवीकरणीय ऊर्जा को ग्रिड से जोड़ने और विश्वसनीय, सस्ती और 24 घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों के घरेलू निर्माण को भी बढ़ावा मिलेगा, जिससे आयात पर निर्भरता कम होगी और देश की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा में सुधार होगा। योजना के तहत 60 गीगावाट घंटे की जल पंप भंडारण परियोजनाएं, 30 गीगावाट घंटे की बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली और वैकल्पिक ऊर्जा भंडारण तकनीकों के माध्यम से 2 गीगावाट घंटे की क्षमता विकसित की जाएगी।


इस योजना पर कुल 97,600 करोड़ रुपये के निवेश का अनुमान है। बयान में कहा गया है कि यह योजना नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण को तेज करेगी, बिजली ग्रिड की स्थिरता को मजबूत करेगी और चौबीस घंटे विश्वसनीय एवं सस्ती बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करेगी। इसमें यह भी कहा गया है कि ऊर्जा भंडारण क्षमता का आवंटन शुल्क आधारित प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा। सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की बिजली वितरण कंपनियां बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली और जल पंप भंडारण परियोजनाओं को व्यावहारिक बनाने के लिए वित्तपोषण सहायता की पात्र होंगी।


वैकल्पिक ऊर्जा भंडारण तकनीकों पर आधारित परियोजनाओं को सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की इकाइयां लागू करेंगी। बयान में कहा गया है कि इस योजना का एक प्रमुख उद्देश्य मांग पक्ष से वित्तीय सहायता देकर देश में ऊर्जा भंडारण के घरेलू निर्माण को मजबूत करना और आयातित उपकरणों पर निर्भरता कम करना है। स्वदेशी निर्माण को बढ़ावा देने के लिए बैटरी ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं में कम से कम 40 प्रतिशत घरेलू सामग्री का उपयोग अनिवार्य होगा।


बयान के अनुसार, इस शर्त से घरेलू निर्माण को प्रोत्साहन मिलेगा, भारतीय उद्योगों के लिए नए अवसर पैदा होंगे और बैटरी निर्माण के लिए पहले से उपलब्ध उत्पादन पक्ष की प्रोत्साहन योजनाओं को मदद मिलेगी। आधिकारिक बयान में कहा गया, 'ग्रिड स्तर पर ऊर्जा भंडारण क्षमता को तेजी से विकसित करने से नवीकरणीय ऊर्जा का अधिक उपयोग संभव होगा। इससे नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन में होने वाले उतार-चढ़ाव की समस्या दूर करने और चौबीस घंटे बिजली की संतुलित आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पारंपरिक बिजली उत्पादन पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।'


इस पहल से बिजली ग्रिड की स्थिरता मजबूत होगी, नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग बढ़ेगा, घरेलू निर्माण को प्रोत्साहन मिलेगा और भारत की ऊर्जा सुरक्षा में सुधार होगा।