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भारत में नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार से 100 अरब डॉलर की बचत

भारत में नवीकरणीय ऊर्जा के तेजी से विकास ने पिछले 15 वर्षों में कोयले और प्राकृतिक गैस के आयात पर 100 अरब डॉलर से अधिक की बचत की है। आईईए की रिपोर्ट के अनुसार, भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे तेजी से बढ़ता नवीकरणीय ऊर्जा बाजार है। 2026 तक इसकी बिजली उत्पादन क्षमता 300 गीगावाट को पार कर जाएगी। जानें इस रिपोर्ट में और क्या कहा गया है और भारत की ऊर्जा सुरक्षा में यह विकास कैसे महत्वपूर्ण है।
 

नवीकरणीय ऊर्जा का तेजी से विकास

नई दिल्ली, 3 नवंबर: देश में नवीकरणीय ऊर्जा के तेजी से विकास के चलते पिछले 15 वर्षों में कोयले और प्राकृतिक गैस के आयात पर 100 अरब डॉलर से अधिक की बचत हुई है। इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा में मजबूती आई है और वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा बाजार में इसकी भूमिका भी महत्वपूर्ण होती जा रही है। यह जानकारी अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) की एक रिपोर्ट में दी गई है।


रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले दशक में भारत की नवीकरणीय बिजली उत्पादन क्षमता लगभग चार गुना बढ़ गई है, और 2026 तक यह 300 गीगावाट को पार कर जाएगी। इसके साथ ही, भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे तेजी से बढ़ता नवीकरणीय ऊर्जा बाजार है और सौर फोटोवोल्टिक (पीवी) मॉड्यूल का दूसरा सबसे बड़ा निर्माता बन गया है। नवीकरणीय ऊर्जा शिखर सम्मेलन में ‘भारत का नवीकरणीय ऊर्जा बाजार’ शीर्षक से जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने 2025 में अपनी स्थापित बिजली क्षमता में 50 प्रतिशत हिस्सेदारी गैर-जीवाश्म ईंधन से हासिल करने का लक्ष्य पहले ही पूरा कर लिया, जबकि इसे 2030 तक पूरा करना था।


रिपोर्ट के अनुसार, नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार से आर्थिक और ऊर्जा सुरक्षा के मोर्चे पर भी ठोस लाभ प्राप्त हुए हैं। 2011 से 2025 के बीच नवीकरणीय बिजली उत्पादन के कारण भारत ने कोयले और प्राकृतिक गैस के आयात पर 100 अरब डॉलर से अधिक की बचत की है। वर्ष 2030 तक कुल बचत दोगुने से अधिक होने की संभावना है।


आईईए के अनुमानों के अनुसार, कोयले के आयात पर इसका प्रभाव विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा है। यदि 2010 के बाद सौर पीवी, पवन और जैव ऊर्जा की अतिरिक्त क्षमता नहीं जोड़ी गई होती, तो 2025 में भारत का कोयला आयात लगभग 11 करोड़ टन अधिक होता। एजेंसी का अनुमान है कि 2030 तक भारत की नवीकरणीय बिजली उत्पादन क्षमता लगभग 530 गीगावाट तक पहुंच जाएगी।


इसमें 80 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि सौर पीवी से होने की उम्मीद है, जिससे गैर-जीवाश्म स्रोतों पर आधारित बिजली क्षमता और मजबूत होगी। हालांकि, दीर्घकालिक लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए सहायक बुनियादी ढांचे में निरंतर निवेश की आवश्यकता होगी।


आईईए के कार्यकारी निदेशक फातिह बिरोल ने कहा कि वैश्विक ऊर्जा बाजारों में बढ़ती अनिश्चितता के बीच भारत में नवीकरणीय ऊर्जा का विस्तार उसकी ऊर्जा सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हुआ है। उन्होंने कहा, 'जब देश घरेलू ऊर्जा आपूर्ति को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं, तब भारत का अनुभव दिखाता है कि निरंतर नीतिगत प्रयासों से नवीकरणीय ऊर्जा की लागत घटाने और निवेश आकर्षित करने में मदद मिल सकती है। यह अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए भी एक उपयोगी सबक है।'


केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि देश की बढ़ती नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता हाल के वर्षों में हुई प्रगति को दर्शाती है। हालांकि, बिजली की बढ़ती मांग को देखते हुए घरेलू विनिर्माण, निवेश और पारेषण बुनियादी ढांचे को और मजबूत करने की आवश्यकता होगी।


जोशी ने कहा, 'भारत का नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में एक बड़ी ताकत के रूप में उभरना हाल के वर्षों में हमारी प्रगति को दर्शाता है।' उन्होंने आगे कहा, 'भारत की बिजली संबंधी जरूरतें लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में हम घरेलू विनिर्माण को मजबूत करके, निवेश जुटाकर और पारेषण बुनियादी ढांचे का विस्तार कर विकास के अगले चरण की नींव रख रहे हैं।'


जोशी ने कहा, 'सुरक्षित, किफायती और टिकाऊ ऊर्जा भविष्य के साझा लक्ष्य को हासिल करने में भारत के साथ आईईए के निरंतर सहयोग की हम सराहना करते हैं।'


रिपोर्ट के अनुसार, आयातित जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटाने के अलावा भारत में नवीकरणीय ऊर्जा का विस्तार घरेलू विनिर्माण को मजबूत करने और वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में विविधता लाने के अवसर भी पैदा कर रहा है, जिसमें खासतौर पर सौर पीवी क्षेत्र शामिल है।