भारत में निजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए सार्वजनिक पूंजीगत खर्च में वृद्धि
सरकार का नया कदम
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को बताया कि सरकार ने निजी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए सार्वजनिक पूंजीगत खर्च में जानबूझकर वृद्धि की है। इसका प्रभाव अब पूंजी निर्माण में वृद्धि, विनिर्माण क्षेत्र में उत्पादन क्षमता के बेहतर उपयोग और उद्योगों को बैंक ऋण में वृद्धि के रूप में स्पष्ट हो रहा है। उल्लेखनीय है कि सरकार ने 2026-27 में पूंजीगत खर्च को 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक बढ़ा दिया है। इसमें केंद्र द्वारा राज्यों को पूंजीगत संपत्तियों के निर्माण के लिए दिए गए अनुदान को शामिल करने पर प्रभावी पूंजीगत खर्च 17 लाख करोड़ रुपये को पार कर गया है.
निवेश में वृद्धि के संकेत
सीतारमण ने एआईएमए (ऑल इंडिया मैनेजमेंट एसोसिएशन) के एक कार्यक्रम में कहा कि सार्वजनिक निवेश के माध्यम से निजी निवेश को आकर्षित करने के परिणाम अब दिखाई दे रहे हैं। 2026-27 की पहली तिमाही में सकल स्थायी पूंजी निर्माण जीडीपी के 34 प्रतिशत से अधिक हो गया, जिसमें वास्तविक आधार पर लगभग 12 प्रतिशत की वृद्धि हुई। विनिर्माण क्षेत्र में उत्पादन क्षमता का उपयोग भी 75 प्रतिशत तक पहुंच गया है.
दोहरे बही-खाते की समस्या का समाधान
उन्होंने कहा कि आर्थिक गतिविधियों में तेजी को दोहरे बही-खाते की समस्या के समाधान से बल मिला है। यह समस्या तब उत्पन्न होती है जब कंपनियों के भारी कर्ज और बैंकों के फंसे कर्ज एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं। सीतारमण ने कहा कि भारत अब इस मोर्चे पर लाभ की स्थिति में है, जहां वाणिज्यिक बैंकों के पास कर्ज देने के लिए पर्याप्त नकदी है और कंपनियां निवेश करने के लिए तैयार हैं.
बैंक ऋण में वृद्धि
वित्त मंत्री ने बताया कि उद्योग को मिलने वाले बैंक ऋण में भी तेजी आई है, जिसमें जून 2026 में सालाना आधार पर 19 प्रतिशत की वृद्धि हुई। उन्होंने कहा कि जरूरतमंद क्षेत्रों तक कर्ज पहुंच रहा है और सरकार के मुक्त व्यापार समझौते भारत के श्रम-प्रधान वस्तुओं और सेवाओं के लिए नए बाजार खोल रहे हैं.
बुनियादी ढांचे में सुधार
सीतारमण ने भारत के बुनियादी ढांचे और माल ढुलाई एवं परिवहन व्यवस्था में सुधारों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि काम की गति में तेजी आई है, जिससे प्रशासनिक देरी की धारणा में बदलाव आया है। प्रमुख बंदरगाहों पर जहाजों के आने-जाने का औसत समय पिछले एक दशक में लगभग आधा हो गया है, और रेल नेटवर्क का लगभग पूरा विद्युतीकरण हो चुका है.
डिजिटल बुनियादी ढांचे का विस्तार
उन्होंने भारत के डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के विस्तार का भी जिक्र किया, जिसमें अगस्त 2026 में प्रतिदिन औसतन 79 करोड़ लेनदेन का निपटान हुआ। सीतारमण ने कहा कि जुलाई 2024 में सत्ता में लौटने के बाद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार के पहले बजट में सुधारों और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया था.
आर्थिक वृद्धि की स्थिति
उन्होंने कहा कि वैश्विक चुनौतियों और वृद्धि में नरमी के बावजूद भारत की आर्थिक वृद्धि और मजबूती बनी हुई है। वित्त मंत्री ने कहा कि आर्थिक सुधार और बढ़ती आय मिलकर मांग को नया रूप दे रहे हैं। भारत संरचनात्मक बदलाव के महत्वपूर्ण दौर में है, और खपत के अगले चरण को उन आय वर्ग के लोगों के ऊपर उठने से गति मिलेगी, जहां गैर-जरूरी खर्च तेजी से बढ़ता है.
भारत की रेटिंग में सुधार
सीतारमण ने कहा कि हाल ही में जापान क्रेडिट रेटिंग एजेंसी ने भारत की दीर्घकालिक विदेशी मुद्रा और स्थानीय मुद्रा जारीकर्ता रेटिंग को ‘बीबीबी प्लस’ से बढ़ाकर ‘ए माइनस’ कर दिया है। यह 35 साल में पहली बार है जब भारत को ‘ए’ श्रेणी की रेटिंग मिली है.