भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में संभावित वृद्धि
पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना
भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में जल्द ही एक महत्वपूर्ण वृद्धि हो सकती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ऊर्जा की खपत को कम करने की अपील इस दिशा में एक संकेत है। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो रही है, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में लगातार वृद्धि हो रही है और तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ रहा है। इस स्थिति में तेल की कीमतों में वृद्धि की संभावना बढ़ गई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य का महत्व
भारत के लिए पेट्रोलियम उत्पादों के अधिकांश आयात का निर्भरता खाड़ी देशों पर है। होर्मुज जलडमरूमध्य तेल के आयात के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग है। तनाव के बावजूद, कुछ जहाजों ने होर्मुज जलडमरूमध्य को पार किया है, लेकिन अभी भी एक दर्जन से अधिक जहाज फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं। फरवरी के अंत में अमेरिका द्वारा ईरान पर हमले के बाद से इस जलडमरूमध्य में आवाजाही प्रभावित हुई है। ताजा घटनाक्रमों के अनुसार, तनाव में कमी की कोई संभावना नहीं दिख रही है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच, पेट्रोलियम और वित्त मंत्रालय के बीच लगातार बैठकें चल रही हैं। सरकार महंगाई, राजकोषीय घाटे और ऊर्जा की कीमतों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है।
तेल कंपनियों को होने वाला नुकसान
इस तिमाही में सरकारी तेल कंपनियों को दो लाख करोड़ रुपये की अंडर डिलीवरी का सामना करना पड़ रहा है। अनुमान है कि इस तिमाही में उन्हें लगभग एक लाख करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है। केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने भी संकेत दिए हैं कि नुकसान बढ़ने के कारण तेल की कीमतों में वृद्धि की जा सकती है।
कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि
पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल के अनुसार, अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 104.68 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। फरवरी में यह आंकड़ा 69.01 डॉलर था। उस समय वेंट क्रूड ऑयल की अंतर्राष्ट्रीय दर 72.50 डॉलर प्रति बैरल थी, जो अब बढ़कर 105 डॉलर प्रति बैरल हो गई है। एनालिसिस सेल के अनुसार, यह दर बीच में 120 डॉलर तक भी पहुंच गई थी।
एक्साइज कटौती का प्रभाव
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर तनाव बढ़ने के बाद, जब कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने लगीं, तो भारत सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में कटौती की ताकि तेल कंपनियों को घाटा सहन करने में मदद मिल सके और उपभोक्ताओं को कच्चे तेल की बढ़ी दरों का कोई नुकसान न हो। आंकड़ों के अनुसार, सरकार को एक्साइज कटौती से अब तक 14000 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है।
2022 के बाद से स्थिर कीमतें
इन परिस्थितियों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऊर्जा खपत कम करने की अपील के चलते एक बार फिर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि की चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, दाम कब बढ़ेंगे और कितने बढ़ेंगे, इस बारे में अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है। उल्लेखनीय है कि खुदरा पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 2022 के बाद से कोई बदलाव नहीं किया गया है।