×

भारत में प्रीमियम घड़ियों की बढ़ती मांग: टाइटन का नया दृष्टिकोण

भारतीय उपभोक्ताओं के बीच महंगी और प्रीमियम घड़ियों की मांग तेजी से बढ़ रही है। टाइटन ने इस रुझान को देखते हुए अपने विशेष स्टोर नेटवर्क का विस्तार करने की योजना बनाई है। कंपनी का मानना है कि आने वाले वर्षों में 25,000 रुपये से अधिक कीमत वाली घड़ियों का कारोबार उसके कुल राजस्व का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है। जानें, टाइटन की रणनीतियों और भारतीय घड़ी उद्योग में हो रहे बदलावों के बारे में।
 

प्रीमियम घड़ियों का बढ़ता आकर्षण

भारतीय उपभोक्ताओं के बीच महंगी और प्रीमियम घड़ियों की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है। इस रुझान को ध्यान में रखते हुए, टाइटन, जो देश की एक प्रमुख घड़ी निर्माता कंपनी है, ने इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण निवेश करने का निर्णय लिया है। कंपनी का अनुमान है कि 25,000 रुपये से अधिक मूल्य वाली घड़ियों का कारोबार अगले दो से तीन वर्षों में उसके कुल राजस्व का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा बन सकता है।


टाइटन की रणनीति

टाइटन के घड़ी विभाग के CEO कुरुविला मार्कोस ने बताया कि प्रीमियम और सुलभ विलासिता श्रेणी की घड़ियों की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है। वर्तमान में, यह श्रेणी लगभग 30 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर से आगे बढ़ रही है, जिसके चलते कंपनी अपने विशेष स्टोर नेटवर्क का तेजी से विस्तार कर रही है।


स्टोर विस्तार की योजना

टाइटन के पास वर्तमान में हेलियोस लक्स के लगभग 10 स्टोर हैं, जहां 25,000 रुपये से अधिक कीमत वाली घड़ियां उपलब्ध हैं। कंपनी इस वित्तीय वर्ष में इन स्टोरों की संख्या बढ़ाकर लगभग 30 करने की योजना बना रही है। इसके अलावा, हेलियोस श्रृंखला के लगभग 300 स्टोर पहले से संचालित हैं और उनका प्रदर्शन भी संतोषजनक है।


बाजार का विकास

कुरुविला मार्कोस ने कहा कि भारत में प्रीमियम घड़ियों का बाजार एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है। घरेलू घड़ी बाजार का लगभग आधा हिस्सा अब 25,000 रुपये से अधिक कीमत वाली घड़ियों का है, और भविष्य में इसके मूल्य में और वृद्धि की संभावना है।


घड़ी उद्योग में बदलाव

भारत का घड़ी उद्योग लंबे समय से कम और मध्यम कीमत वाले उत्पादों पर निर्भर रहा है। लेकिन हाल के वर्षों में बढ़ती आय, बेहतर जीवनशैली और ब्रांडेड उत्पादों की ओर झुकाव ने प्रीमियम घड़ियों की मांग को नया मोड़ दिया है। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय ब्रांड भी भारतीय बाजार में अपनी उपस्थिति बढ़ा रहे हैं।


भविष्य की संभावनाएं

टाइटन का मानना है कि भारत भविष्य में स्विट्जरलैंड, जापान और चीन के बाद वैश्विक घड़ी निर्माण का एक प्रमुख केंद्र बन सकता है। कंपनी के अनुसार, देश में घड़ी निर्माण की तकनीक, डिजाइन और कारीगरी में निरंतर सुधार हो रहा है। इसके साथ ही, लोग घड़ियों को केवल समय देखने के साधन के बजाय एक विशेष पहचान और संग्रहणीय वस्तु के रूप में देख रहे हैं।


कम कीमत वाली घड़ियों का बाजार

हालांकि, कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि कम कीमत वाली घड़ियों का बाजार भी मजबूत बना हुआ है। फास्टट्रैक, सोनाटा और अन्य लोकप्रिय ब्रांडों की बिक्री में भी अच्छी वृद्धि हो रही है। टाइटन का मानना है कि उपभोक्ता अब बिना ब्रांड वाली घड़ियों से ब्रांडेड घड़ियों की ओर बढ़ रहे हैं।


आयात शुल्क में कमी

हाल ही में भारत और यूरोपीय देशों के बीच व्यापार समझौतों के कारण स्विस घड़ियों पर आयात शुल्क में कमी आने की संभावना है। इससे विदेशी प्रीमियम घड़ियों की उपलब्धता और मांग दोनों में वृद्धि हो सकती है। टाइटन पहले ही हरबेलिन, ऑगस्टे रेमंड और यू-बोट जैसे कई अंतरराष्ट्रीय ब्रांड भारतीय बाजार में ला चुकी है और भविष्य में नए ब्रांड जोड़ने की योजना बना रही है।