भारत में बाल यौन शोषण सामग्री पर मेटा के साथ सरकार की बातचीत में तेजी
बाल यौन शोषण सामग्री पर कार्रवाई में तेजी
अमेरिकी कंपनी मेटा के साथ बातचीत के बाद, भारत सरकार ने बाल यौन शोषण सामग्री (सीएसएएम) के मुद्दे पर कार्रवाई को तेज और संवेदनशील बनाने का निर्णय लिया है। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, केंद्र ने स्पष्ट किया है कि ऐसी सामग्री कानून का उल्लंघन करती है और इसके लिए 'सेफ हार्बर' का संरक्षण नहीं मिलेगा।
‘सेफ हार्बर’ एक कानूनी प्रावधान है जो इंटरनेट मध्यस्थों और सोशल मीडिया प्लेटफार्मों को उपयोगकर्ताओं द्वारा साझा की गई सामग्री के लिए कानूनी जिम्मेदारी से बचाता है।
सूत्रों ने बताया कि सरकार का उद्देश्य 'सेंसरशिप' या किसी प्रकार की 'कवरेज' को सीमित करना नहीं है, बल्कि भारतीय कानूनों का पालन सुनिश्चित करना और सोशल मीडिया से होने वाले नुकसान को कम करना है। उन्होंने कहा, 'संदेश स्पष्ट हो गया है।'
मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि बातचीत के दौरान मेटा ने अपने 'एल्गोरिदम' और प्रणालियों के कार्य करने के तरीके के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बातचीत जारी है और ऐसे मामलों में 'निर्णय लेने और बदलाव' की आवश्यकता होती है।
व्हाट्सऐप यूजरनेम विवाद और अंतरराष्ट्रीय चिंताएं
व्हाट्सऐप यूजरनेम विवाद पर सूत्रों ने कहा कि मामले की जांच चल रही है, क्योंकि यह केवल उस प्लेटफार्म से संबंधित नहीं है, बल्कि अन्य संदेश ऐप्स भी इससे प्रभावित हैं।
सूत्रों ने यह भी बताया कि सोशल मीडिया से होने वाले नुकसान की चिंता केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और फ्रांस जैसे अन्य देशों में भी यह मुद्दा उठ रहा है।
उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया से होने वाले नुकसान का समाधान और सही संतुलन बनाए रखने की जिम्मेदारी प्लेटफार्मों की है।
‘एआई लेबलिंग’ पर मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि कानून स्पष्ट है कि कृत्रिम रूप से तैयार की गई सामग्री पर 'लेबल' लगाना अनिवार्य है और इसकी जिम्मेदारी तीन स्तरों पर है, जिसमें प्लेटफार्म भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि प्लेटफार्मों को इसके अनुसार नियमों का पालन करना होगा।
अमेरिकी कंपनी मेटा फेसबुक, व्हाट्सऐप और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफार्मों का संचालन करती है।