भारत में बुनियादी ढांचे के लिए निवेश की आवश्यकता: 40 लाख करोड़ रुपये का लक्ष्य
बुनियादी ढांचे में निवेश की आवश्यकता
भारत को दीर्घकालिक आर्थिक विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए बुनियादी ढांचे में सालाना निवेश को दोगुना करके 40 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाना होगा। यह जानकारी नैबफिड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बुधवार को साझा की। वर्तमान में, देश में बुनियादी ढांचे के लिए लगभग 20 लाख करोड़ रुपये का वार्षिक निवेश हो रहा है।
इसके अलावा, बुनियादी ढांचे और विनिर्माण दोनों क्षेत्रों में निवेश में उल्लेखनीय वृद्धि की आवश्यकता है। नैबफिड, जो एक विकास वित्त संस्थान है, का उद्देश्य देश में सड़क, रेल, बंदरगाह, हवाई अड्डे और बिजली जैसी अवसंरचना परियोजनाओं के लिए दीर्घकालिक वित्त उपलब्ध कराना है।
नैबफिड के प्रबंध निदेशक राजकिरण राय ने फिक्की और भारतीय बैंक संघ (आईबीए) के वार्षिक कार्यक्रम में एक चर्चा के दौरान कहा, 'अगले 20 वर्षों में बुनियादी ढांचे में लगभग 800 लाख करोड़ रुपये का निवेश आवश्यक होगा। इसका मतलब है कि हर साल लगभग 40 लाख करोड़ रुपये का निवेश करना होगा, जबकि वर्तमान में हम मुश्किल से 20 लाख करोड़ रुपये का निवेश कर पा रहे हैं।'
विनिर्माण क्षेत्र में भी पूंजीगत निवेश को बड़े पैमाने पर बढ़ाने की आवश्यकता है। राय ने बताया कि पूंजीगत निवेश केवल बुनियादी ढांचे तक सीमित नहीं है, बल्कि विनिर्माण क्षेत्र में भी इसे बढ़ाना होगा। भारत ने विनिर्माण क्षेत्र के अपेक्षित विकास से पहले ही सेवा क्षेत्र में तेजी से प्रगति की है। उन्होंने कहा कि सेवा क्षेत्र ने भारत की आर्थिक वृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और अर्थव्यवस्था को चार लाख करोड़ डॉलर के स्तर के करीब लाने में मदद की है, लेकिन अब विनिर्माण क्षेत्र में निवेश बढ़ाना आवश्यक है।
उन्होंने आगे कहा, 'उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना और अन्य पहलों से इस दिशा में तेजी आई है। विनिर्माण और बुनियादी ढांचे में निवेश अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि हमें टिकाऊ तरीके से नौ प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि हासिल करनी है, तो मौजूदा निवेश को लगभग दोगुना करना होगा।'