×

भारत में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: चीन के राष्ट्रपति की यात्रा और व्यापार संबंध

भारत मंडपम में 12 और 13 सितंबर को 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन हो रहा है, जिसमें चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग भाग ले रहे हैं। इस लेख में भारत और चीन के बीच व्यापार संबंधों का विश्लेषण किया गया है, जिसमें निर्यात, आयात और व्यापार घाटे की स्थिति पर चर्चा की गई है। इसके अलावा, भारत की चीन पर निर्भरता और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के पहलुओं पर भी प्रकाश डाला गया है।
 

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन

भारत मंडपम में 12 और 13 सितंबर को 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन हो रहा है। इस सम्मेलन में भाग लेने के लिए चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग, सात साल बाद पहली बार भारत आए हैं। चिनफिंग की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ बातचीत का कार्यक्रम भी निर्धारित है।


भारत-चीन व्यापार का विश्लेषण

चीन 2025-26 में भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बना। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2025-26 में 7.9 प्रतिशत बढ़कर 127.7 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो 2024-25 में 118.39 अरब डॉलर था। व्यापार घाटा पिछले वित्त वर्ष में बढ़कर 99.19 अरब डॉलर हो गया।


निर्यात और आयात की स्थिति

भारत का चीन को निर्यात 2025-26 में 36.62 प्रतिशत बढ़कर 19.47 अरब डॉलर हो गया, जबकि आयात 16 प्रतिशत बढ़कर 131.62 अरब डॉलर तक पहुंच गया। वित्त वर्ष 2025-26 में चीन का भारत के कुल वस्तु आयात में हिस्सा लगभग 17 प्रतिशत था।


चीन पर निर्भरता

चीन से भारत के आयात में 98.5 प्रतिशत हिस्सा औद्योगिक उत्पादों का था। इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, और कार्बनिक रसायनों का आयात मुख्य रूप से चीन से होता है। भारतीय उद्योग इन कच्चे माल पर काफी निर्भर है।


भारत का निर्यात बढ़ाने का प्रयास

भारत निर्यात बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन उसकी आपूर्ति श्रृंखलाएं चीन से जुड़ी हुई हैं। वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, व्यापार घाटे का मुख्य कारण कच्चे माल और पूंजीगत सामान का आयात है।


प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की स्थिति

भारत को अप्रैल 2000 से मार्च 2026 के बीच 2.51 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश मिला है। मार्च में भारत ने उन देशों की कंपनियों के लिए एफडीआई नियमों में ढील दी, जो भारत के साथ भूमि सीमा साझा नहीं करते हैं।


ब्रिक्स का महत्व

ब्रिक्स एक महत्वपूर्ण समूह के रूप में उभरा है, जिसमें दुनिया की 11 प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं। इनकी वैश्विक आबादी में लगभग 49.5 प्रतिशत, वैश्विक जीडीपी में 40 प्रतिशत और वैश्विक व्यापार में 26 प्रतिशत हिस्सेदारी है।