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भारत में महंगाई की चिंता: जुलाई में खुदरा महंगाई 4.45% पर पहुंची

भारत में महंगाई की दर जुलाई में 4.45 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो लगातार नौवें महीने की वृद्धि को दर्शाती है। खाद्य महंगाई 5.5 प्रतिशत रही, जबकि परिवहन लागत में भी वृद्धि हुई है। वैश्विक ऊर्जा संकट और अन्य कारकों के चलते महंगाई पर दबाव बढ़ रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक ने ब्याज दरों में संभावित वृद्धि की संभावना जताई है। जानें इस स्थिति के पीछे के कारण और भविष्य की चुनौतियों के बारे में।
 

महंगाई की नई ऊंचाई

देश में महंगाई को लेकर चिंताएं फिर से बढ़ने लगी हैं। जुलाई में खुदरा महंगाई दर 4.45 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो लगातार नौवें महीने उपभोक्ता कीमतों में वृद्धि को दर्शाती है। जून में यह दर 4.38 प्रतिशत थी। हालांकि, जुलाई का आंकड़ा अर्थशास्त्रियों की अपेक्षाओं से थोड़ा कम रहा, क्योंकि रॉयटर्स द्वारा किए गए सर्वे में महंगाई के 4.50 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया था.


खाद्य महंगाई और परिवहन लागत

जुलाई में खाद्य महंगाई दर 5.5 प्रतिशत रही है। इसके अलावा, निजी परिवहन और माल ढुलाई से संबंधित महंगाई भी सात प्रतिशत से अधिक रही। परिवहन लागत में वृद्धि का सीधा असर रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर पड़ सकता है, क्योंकि सामान को एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचाने की लागत बढ़ने से व्यापारियों का खर्च भी बढ़ता है.


वैश्विक ऊर्जा संकट का प्रभाव

महंगाई में यह वृद्धि ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बना हुआ है। ईरान से जुड़े संघर्ष और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण तेल की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका है। लाल सागर और ओमान की खाड़ी में जहाजों पर हुए हमलों के बाद समुद्री रास्तों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। इन घटनाओं के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत लगभग 90 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है.


भारत की ईंधन जरूरतें

भारत अपनी ईंधन जरूरतों का लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है। इस प्रकार, वैश्विक तेल कीमतों में वृद्धि का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था और महंगाई पर पड़ सकता है। होर्मुज जलडमरूमध्य से आने वाली ऊर्जा आपूर्ति भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि इस मार्ग में कोई बड़ी रुकावट आती है, तो ईंधन की कीमतों पर और दबाव बढ़ सकता है.


आरबीआई की स्थिति

भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने स्वीकार किया है कि कुल महंगाई चार प्रतिशत के निर्धारित लक्ष्य से ऊपर चली गई है। हालांकि, उन्होंने कहा कि मूल महंगाई अभी सामान्य स्तर पर बनी हुई है। उनके अनुसार, देश की आर्थिक वृद्धि अब तक मजबूत रही है, लेकिन भविष्य में अनिश्चितताएं बनी हुई हैं, जैसे मानसून, अल नीनो, भू-राजनीतिक घटनाक्रम और वैश्विक व्यापार नीतियां.


भविष्य की संभावनाएं

आरबीआई का अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष की अक्टूबर से दिसंबर वाली तिमाही में महंगाई अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच सकती है। इसके बाद स्थिति में सुधार की उम्मीद है। हालांकि, यदि खाद्य वस्तुओं और उत्पादन लागत में वृद्धि जारी रहती है, तो महंगाई पर दबाव लंबे समय तक बना रह सकता है.


ब्याज दरों में संभावित वृद्धि

इस कारण से बाजार में यह संभावना बढ़ रही है कि भारतीय रिजर्व बैंक इस साल के अंत में ब्याज दरों में वृद्धि कर सकता है। मॉर्गन स्टैनली ने दिसंबर से दरें बढ़ने का अनुमान लगाया है, जिसके अनुसार कुल 75 आधार अंकों की वृद्धि हो सकती है और नीतिगत दर छह प्रतिशत तक पहुंच सकती है.


आगामी चुनौतियां

मॉर्गन स्टैनली का अनुमान है कि मार्च 2027 में समाप्त होने वाले वित्त वर्ष में भारत की औसत महंगाई पांच प्रतिशत रह सकती है। इसके पीछे खाद्य महंगाई और उत्पादन लागत में संभावित वृद्धि को मुख्य कारण माना गया है। इस प्रकार, आने वाले महीनों में भारतीय रिजर्व बैंक के लिए महंगाई पर नियंत्रण और आर्थिक वृद्धि की गति बनाए रखने के बीच संतुलन बनाना एक बड़ी चुनौती होगी.