भारत में मोबाइल फोन उद्योग को 19,000 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन
मोबाइल फोन उद्योग में प्रोत्साहन और कर संग्रह
(फाइल फोटो के साथ) नयी दिल्ली, 28 अक्टूबर: सरकार ने मोबाइल फोन क्षेत्र को 19,000 करोड़ रुपये का उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) प्रदान किया है, जिसके बदले में इस उद्योग से कुल 3.25 लाख करोड़ रुपये कर के रूप में प्राप्त किए हैं। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर बुधवार को साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, इस योजना के तहत 19,000 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन दिया गया और इसके बदले लाभार्थियों से 25,000 करोड़ रुपये प्रत्यक्ष कर तथा तीन लाख करोड़ रुपये माल एवं सेवा कर (जीएसटी) के रूप में प्राप्त हुए। वैष्णव ने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र में 25 लाख लोगों को रोजगार मिलता है।
उन्होंने कहा, "केवल मोबाइल विनिर्माण क्षेत्र में 12 लाख लोग कार्यरत हैं। हमें और अधिक प्रयास करने की आवश्यकता है।" मंत्री की यह टिप्पणी एक मीडिया वीडियो के जवाब में आई, जिसमें सार्वजनिक धन से सब्सिडी देकर इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा देने की भारत की कोशिशों की आलोचना की गई थी।
इस वीडियो में कहा गया कि सब्सिडी के माध्यम से करदाताओं के पैसे से निर्मित मोबाइल फोन के निर्यात से भारत को जितना लाभ होता है, उससे अधिक खर्च उसे कलपुर्जों के आयात पर करना पड़ता है। सरकार द्वारा मार्च में साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, भारत ने वित्त वर्ष 2024-25 में दो लाख करोड़ रुपये मूल्य के मोबाइल फोन का निर्यात किया। देश में मोबाइल फोन का आयात 2024-25 में घरेलू मांग का लगभग 0.02 प्रतिशत रह गया, जबकि 10 साल पहले यह 75 प्रतिशत था।
इलेक्ट्रॉनिक सामान का उत्पादन 2014-15 में लगभग 1.9 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2024-25 में करीब 11.3 लाख करोड़ रुपये हो गया। इसी अवधि में मोबाइल फोन का उत्पादन लगभग 0.18 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर करीब 5.5 लाख करोड़ रुपये हो गया। इलेक्ट्रॉनिक सामान का निर्यात भी 10 साल पहले के 0.38 लाख करोड़ रुपये से आठ गुना बढ़कर 2024-25 में करीब 3.3 लाख करोड़ रुपये हो गया।
सरकार ने अब मोबाइल फोन के स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 62,500 करोड़ रुपये के कुल प्रोत्साहन वाली मोबाइल फोन विनिर्माण योजना (एमपीएमएस) शुरू की है। इस योजना का उद्देश्य ऐसे भारतीय स्मार्टफोन विकसित करना है, जिनका डिजाइन और विनिर्माण देश में ही किया जाएगा। वैष्णव ने भारतीय स्मार्टफोन ब्रांड के लक्ष्य को पूरा करने के लिए अक्टूबर 2028 की समयसीमा निर्धारित की है।