भारत में लोन प्रक्रिया को सरल बनाने वाला नया डिजिटल सिस्टम
रिजर्व बैंक की मंजूरी से 'सहमति' संस्था की भूमिका
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने 'सहमति' संस्था को अकाउंट एग्रीगेटर सिस्टम की देखरेख करने के लिए अधिकृत किया है। इस निर्णय के बाद, देश में डिजिटल माध्यम से वित्तीय जानकारी साझा करना और भी सुरक्षित और सरल हो जाएगा। इससे आम नागरिकों के लिए लोन प्राप्त करना आसान होगा और समय की बचत होगी। 'सहमति' एक गैर-लाभकारी संस्था है, जो इस नेटवर्क का संचालन करेगी और इसके लिए आवश्यक नियमों का निर्धारण करेगी। इस नए सिस्टम के तहत, लोन के लिए बार-बार कागजी बैंक स्टेटमेंट जमा करने की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी.
पुरानी प्रक्रिया की समस्याएं
पहले, लोन के लिए आवेदन करने पर व्यक्तियों को अपने बैंक से पिछले छह महीने या एक साल का बैंक स्टेटमेंट प्राप्त करना पड़ता था। कई बार, इंटरनेट बैंकिंग से पीडीएफ डाउनलोड करके उसे लोन देने वाली कंपनी की वेबसाइट या ऐप पर अपलोड करना पड़ता था। इस प्रक्रिया में समय की बर्बादी होती थी और कागजी दस्तावेजों के चोरी होने का खतरा भी रहता था.
नए सिस्टम की सुविधाएं
नए सिस्टम के आने से यह प्रक्रिया पूरी तरह बदल गई है। अब ग्राहकों को कोई पेपर या पीडीएफ फाइल डाउनलोड करने की आवश्यकता नहीं है। जब कोई व्यक्ति लोन के लिए आवेदन करता है, तो बैंक उसके फोन पर एक मंजूरी का संदेश भेजता है। ग्राहक के क्लिक करते ही उसका डेटा सीधे और सुरक्षित तरीके से लोन देने वाले बैंक तक पहुंच जाता है। इससे लोन मिलने की प्रक्रिया अब कुछ ही मिनटों में पूरी हो जाती है.
अकाउंट एग्रीगेटर सिस्टम की कार्यप्रणाली
अकाउंट एग्रीगेटर एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जो ग्राहकों की अनुमति से उनके बैंक और वित्तीय डेटा को अन्य कंपनियों के साथ सुरक्षित तरीके से साझा करता है। यह सिस्टम डेटा देने वाले बैंकों और डेटा का उपयोग करने वाली वित्तीय कंपनियों के बीच एक मध्यस्थ की तरह कार्य करता है। जब कोई ग्राहक लोन के लिए आवेदन करता है, तो बैंक उसकी अनुमति लेकर इस सिस्टम के माध्यम से आवश्यक जानकारी तुरंत देख सकते हैं। इससे बैंकों को यह निर्णय लेने में आसानी होती है कि संबंधित ग्राहक को लोन देना है या नहीं, और धोखाधड़ी का खतरा भी कम हो जाता है.
बड़ी कंपनियों का निवेश
इस वर्ष अप्रैल में, 'सहमति' संस्था ने देश के प्रमुख बैंकों और कंपनियों से 50 करोड़ रुपये जुटाए थे। इसमें स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक और एक्सिस बैंक जैसे बड़े सरकारी और निजी बैंक शामिल हैं। इसके अलावा, बजाज फिनसर्व और आदित्य बिड़ला जैसी प्रमुख वित्तीय कंपनियों ने भी इसमें निवेश किया है। इन बड़े बैंकों की इसमें लगभग 7.5 से 8.5 प्रतिशत की हिस्सेदारी है. साथ ही, जीरोधा, एंजेल वन और धन जैसे शेयर मार्केट से जुड़े ब्रोकरों ने भी इसमें 8 प्रतिशत की हिस्सेदारी ली है, जबकि डेजर्व नामक एक नए स्टार्टअप ने 2 प्रतिशत का हिस्सा खरीदा है.
डिजिटल सिस्टम का तेजी से बढ़ता उपयोग
भारत में इस नए डिजिटल सिस्टम का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। अब तक 1,120 से अधिक सरकारी और निजी वित्तीय कंपनियां इस नेटवर्क से जुड़ चुकी हैं। इस सिस्टम के माध्यम से लोग अब तक 45 करोड़ से अधिक बार अपना डेटा साझा करने की अनुमति दे चुके हैं। वर्तमान में, देश के 29 करोड़ से अधिक बैंक खाते इस सिस्टम से जुड़े हैं और हर महीने करोड़ों बार डेटा साझा किया जा रहा है। लोग इसका लाभ लोन लेने, बीमा कराने और अपने वित्त को प्रबंधित करने में उठा रहे हैं.
'सहमति' संस्था की नई जिम्मेदारियां
अब रिजर्व बैंक से विशेष मंजूरी मिलने के बाद, 'सहमति' संस्था इस नेटवर्क के लिए कार्यप्रणाली के सरल नियम और तरीके निर्धारित करेगी। यदि नेटवर्क से जुड़ी कंपनियों के बीच कोई विवाद या समस्या उत्पन्न होती है, तो यह संस्था उसे आपस में मिलकर सुलझाएगी। रिजर्व बैंक के पूर्व डिप्टी गवर्नर और 'सहमति' संस्था के चेयरमैन आर गांधी ने बताया कि यह नया सिस्टम डिजिटल युग में वित्तीय जानकारी साझा करने के तरीके को पूरी तरह बदल रहा है। आज के समय में डेटा की सुरक्षा और नए तरीकों को बढ़ावा देना अत्यंत आवश्यक है.