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भारत में विदेशी निवेश में गिरावट: आंकड़ों का विश्लेषण

भारत में विदेशी निवेश में हाल के वर्षों में गिरावट आई है, जिससे निवेशकों का विश्वास कमजोर हुआ है। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष के कारण भारतीय शेयर बाजारों से लगभग 2.2 लाख करोड़ रुपये निकाले गए हैं। वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, पिछले चार वर्षों में नेट प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में चार गुना कमी आई है। इस लेख में हम जानेंगे कि किन क्षेत्रों में निवेश हो रहा है और इसके पीछे के कारण क्या हैं।
 

विदेशी निवेश का महत्व

किसी भी राष्ट्र में विदेशी निवेश को सकारात्मक संकेत माना जाता है। यह दर्शाता है कि वैश्विक स्तर पर उस देश की अर्थव्यवस्था पर विश्वास बढ़ रहा है और अन्य देशों के निवेशक वहां पूंजी लगाने के इच्छुक हैं। हाल के वर्षों में भारत में विदेशी निवेश में वृद्धि हुई है, लेकिन पिछले तीन-चार वर्षों में विदेशी निवेशकों का विश्वास कमजोर हुआ है। अमेरिका और इजरायल के बीच ईरान के साथ चल रहे संघर्ष के कारण भारतीय शेयर बाजारों से विदेशी निवेशकों ने लगभग 2.2 लाख करोड़ रुपये निकाल लिए हैं। इसके अलावा, पिछले चार वर्षों के आंकड़े यह दर्शाते हैं कि शुद्ध प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) में लगभग चार गुना कमी आई है।


संसद में उठे सवाल

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPM) के राज्यसभा सांसद डॉ. जॉन ब्रिटास ने इस मुद्दे पर संसद में प्रश्न उठाया। उन्होंने पिछले चार वर्षों में आए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के आंकड़े मांगे और राज्यवार तथा श्रेणीवार विवरण भी मांगा। इसके साथ ही, उन्होंने यह भी पूछा कि कितने विदेशी निवेशकों ने अपना धन भारत से निकाला है और क्या सरकार ने इसके पीछे के कारणों की जांच की है। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने इस पर लिखित उत्तर दिया।


नेट FDI का अर्थ

नेट FDI का मतलब है कि हर साल जितना विदेशी निवेश आता है और जितना बाहर जाता है, उनके बीच का अंतर। उदाहरण के लिए, यदि किसी वर्ष भारत में 10 रुपये का विदेशी निवेश आता है और उसी वर्ष निवेशक 6 रुपये निकाल लेते हैं, तो नेट FDI 4 रुपये होगा।


आंकड़ों का विश्लेषण

वित्त मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़े बताते हैं कि भारत में जितना निवेश आ रहा है, उससे अधिक निवेशक पैसे निकाल रहे हैं। इसके परिणामस्वरूप, चार वर्षों में नेट FDI में लगभग चार गुना कमी आई है। पिछले दो वर्षों के आंकड़ों के अनुसार, निवेशकों ने धन लगाने में वृद्धि की है, लेकिन अधिकतर ने पैसे निकाल लिए हैं।


2022-23 में भारत में लगभग 71.35 बिलियन डॉलर का निवेश आया, जबकि 2025-26 में यह बढ़कर 94.84 बिलियन डॉलर हो गया। इसका मतलब है कि चार वर्षों में केवल 32.92 प्रतिशत की वृद्धि हुई।


इसी अवधि में, आउटफ्लो यानी विदेशी निवेशकों द्वारा निकाले गए पैसे में लगभग दोगुना वृद्धि हुई है। 2022-23 में यह 29.35 बिलियन डॉलर था, जो 2025-26 में 54.04 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया।


नेट FDI में कमी

वित्त मंत्रालय के उत्तर से स्पष्ट होता है कि पिछले चार वर्षों में नेट प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में लगभग चार गुना कमी आई है। 2022-23 में नेट विदेशी निवेश 27.99 बिलियन अमेरिकी डॉलर था, जो 2025-26 में घटकर केवल 6.95 बिलियन अमेरिकी डॉलर रह गया। 2023-24 में नेट FDI 10.13 बिलियन डॉलर और 2024-25 में केवल 0.96 बिलियन डॉलर था।


निवेश के क्षेत्र

राज्य और श्रेणी के अनुसार आंकड़ों का विश्लेषण करने पर, महाराष्ट्र सबसे अधिक निवेश प्राप्त करने वाला राज्य है। पिछले दो वर्षों में कर्नाटक ने भी विदेशी निवेश में उल्लेखनीय वृद्धि की है। 2024-25 में कर्नाटक में 6619 मिलियन डॉलर का निवेश आया, जो 2025-26 में बढ़कर 12,939 मिलियन डॉलर हो गया।


भारत में सबसे अधिक विदेशी निवेश सेवा क्षेत्र और कंप्यूटर हार्डवेयर एवं सॉफ्टवेयर क्षेत्र में हुआ है। 2025-26 में इन दोनों क्षेत्रों में मिलाकर लगभग 24 हजार मिलियन डॉलर का निवेश हुआ। इसके अलावा, ट्रेडिंग, गैर-परंपरागत ऊर्जा, खाद्य प्रसंस्करण, निर्माण और अन्य क्षेत्रों में भी विदेशी निवेश हुआ है।


डेटा का चित्रण