भारत-यूके के बीच ऐतिहासिक व्यापार समझौता: आर्थिक संबंधों में नई दिशा
भारत और यूके के बीच आर्थिक साझेदारी की शुरुआत
भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच एक महत्वपूर्ण आर्थिक साझेदारी की शुरुआत हो चुकी है। कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट (CETA) बुधवार, 15 जुलाई से प्रभावी हो गया है। इस समझौते का प्रभाव न केवल व्यापारिक संबंधों पर पड़ेगा, बल्कि यह भारतीय उपभोक्ताओं और स्थानीय उद्योगों के लिए भी लाभकारी साबित होगा। वर्तमान में, भारत और यूके के बीच व्यापार का कुल वॉल्यूम 55-60 अरब डॉलर है, और अगले 3-4 वर्षों में इसे 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य है। इस डील के तहत, भारत के टेक्सटाइल, लेदर, फुटवियर, रत्न और आभूषण, और प्लास्टिक उत्पाद बिना किसी ड्यूटी के ब्रिटिश बाजार में प्रवेश कर सकेंगे।
PM मोदी की टिप्पणी
प्रधानमंत्री मोदी ने इस समझौते को दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने वाला बताया। उन्होंने कहा कि यह भारतीय किसानों, श्रमिकों, MSME, स्टार्टअप और इनोवेटर्स के लिए नए अवसर खोलेगा और 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद करेगा। यह डील पिछले साल जुलाई में पीएम मोदी की लंदन यात्रा के दौरान तय हुई थी।
UK में भारतीय उत्पादों पर टैरिफ में कमी
एक ब्रिटिश रिपोर्ट के अनुसार, इस समझौते से UK और भारत के उद्योगों को कई लाभ होंगे। उदाहरण के लिए, व्हिस्की पर टैरिफ 150 प्रतिशत से घटकर 40 प्रतिशत हो जाएगा, जबकि ऑटोमोटिव पर यह 100 प्रतिशत से घटकर 10 प्रतिशत हो जाएगा। इसके अलावा, कॉस्मेटिक्स पर 22 प्रतिशत तक का टैरिफ भी कम किया जाएगा।
भारतीय सामानों पर टैरिफ में कमी
UK में आने वाले भारतीय सामानों जैसे कपड़े, जूते और खाद्य उत्पादों पर टैरिफ में कमी की जाएगी। इससे ब्रिटिश व्यवसायों के लिए लागत कम होगी, जिससे उपभोक्ताओं को बेहतर कीमतें और अधिक विकल्प मिलेंगे।
व्यापार में वृद्धि की उम्मीद
इस समझौते से भारतीय निर्यातकों को सबसे अधिक लाभ होगा, क्योंकि भारत अब अपने लगभग 99% उत्पादों को बिना किसी इंपोर्ट टैक्स के UK में भेज सकेगा। इससे भारतीय कंपनियों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी और निर्यात में वृद्धि की संभावना है। टेक्सटाइल, रेडीमेड गारमेंट्स, लेदर, फुटवियर, सीफ़ूड, खिलौने, रत्न और आभूषण जैसे क्षेत्रों को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है।
किसानों और डेयरी उद्योग की सुरक्षा
सरकार ने कई कृषि उत्पादों, जैसे डेयरी, चीनी, चावल, सेब, चीज़, चिकन, पोर्क और अंडे को इस समझौते से बाहर रखा है। इसका उद्देश्य भारतीय किसानों और डेयरी उद्योग को विदेशी उत्पादों से होने वाली प्रतिस्पर्धा से बचाना है।
आर्थिक संबंधों में सुधार
यह समझौता दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूत करेगा। अनुमान है कि 2040 तक भारत और UK के बीच व्यापार में लगभग 39% की वृद्धि हो सकती है, जिससे अरबों पाउंड का अतिरिक्त व्यापार होगा और भारत के निर्यात, निवेश और रोजगार के अवसरों में वृद्धि होगी।
सस्ते उत्पाद और लाभकारी क्षेत्र
समुद्री उत्पाद, टेक्सटाइल, लेदर सामान, ऑटो कंपोनेंट्स, इलेक्ट्रिकल उपकरण, केमिकल्स, और रत्न और आभूषण जैसे क्षेत्रों को लाभ होगा। इसके अलावा, प्रीमियम ब्रिटिश कारें, इलेक्ट्रिक गाड़ियां, व्हिस्की, चॉकलेट, बिस्कुट, मशीनरी और मेडिकल डिवाइस भी सस्ते होंगे।