भारत-यूरोपीय संघ आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में वित्त मंत्री की पहल
भारत और यूरोपीय संघ के बीच आर्थिक सहयोग
वॉशिंगटन में, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने यूरोपीय आर्थिक आयुक्त वाल्दिस डोम्ब्रोव्स्किस से मुलाकात की। इस बैठक में भारत-यूरोपीय संघ (ईयू) के आर्थिक और वित्तीय सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा हुई।
सीतारमण ने मंगलवार को एशविल में जी20 देशों के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों की बैठक के दौरान डोम्ब्रोव्स्किस से बातचीत की। वित्त मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है कि दोनों पक्षों ने भारत-ईयू व्यापक आर्थिक संवाद और व्यापार एवं प्रौद्योगिकी परिषद (टीटीसी) के माध्यम से आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने पर विचार किया।
उन्होंने भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) और निवेश संरक्षण समझौते पर चल रही वार्ता पर भी चर्चा की और इन प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।
दोनों नेताओं ने महत्वपूर्ण कच्चे माल और प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देने के लिए मजबूत और विविध आपूर्ति श्रृंखलाएं बनाने पर विचार साझा किया। सीतारमण ने कहा कि केवल महत्वपूर्ण खनिजों की खरीद पर ध्यान केंद्रित नहीं करना चाहिए, बल्कि उनके प्रसंस्करण और देश में उत्पादन बढ़ाने की क्षमता को भी विकसित करना चाहिए।
सीतारमण और डोम्ब्रोव्स्किस ने वित्तीय प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और जनरेटिव एआई के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर भी चर्चा की। इसमें भारतीय और यूरोपीय स्टार्टअप के बीच संपर्क को बढ़ावा देने का भी उल्लेख किया गया।
वित्त मंत्रालय के बयान के अनुसार, दोनों पक्षों ने भारत-ईयू साझेदारी को मजबूत करने और साझा प्राथमिकताओं पर मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता को दोहराया।
सीतारमण ने सोमवार को एशविल में दक्षिण कोरिया के उप प्रधानमंत्री कू यून-चियोल से भी मुलाकात की। उन्होंने कहा कि भारत दक्षिण कोरिया को एक महत्वपूर्ण आर्थिक साझेदार मानता है और दोनों देशों के संबंधों से कई क्षेत्रों में लाभ हुआ है।
दोनों मंत्रियों ने द्विपक्षीय आर्थिक और वित्तीय सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा की, जिसमें भारत-कोरिया वित्त मंत्रियों की बैठक को आगे बढ़ाने के लिए कार्यस्तर पर बातचीत शुरू करने का भी प्रस्ताव शामिल था।
सीतारमण ने कहा कि भारत और दक्षिण कोरिया के बीच 2015 से विशेष रणनीतिक साझेदारी है। उन्होंने बताया कि अप्रैल 2026 में राष्ट्रपति ली की भारत यात्रा के दौरान घोषित 2026-2030 के लिए संयुक्त रणनीतिक दृष्टिकोण से इस संबंध को और मजबूती मिली है।
वित्त मंत्री ने कहा कि भारत महत्वपूर्ण खनिजों और मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाओं जैसे उभरते क्षेत्रों में भारत-कोरिया सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है।
उन्होंने कहा कि दोनों देशों की जनता और उद्योगों के लिए इस साझेदारी को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता बनी हुई है।
सीतारमण ने उभरते क्षेत्रों में दक्षिण कोरिया से अधिक निवेश का स्वागत किया और कहा कि भारतीय कंपनियां भी दोनों देशों के बीच पारस्परिक रूप से लाभकारी निवेश प्रवाह को बढ़ावा देने के लिए दक्षिण कोरिया में निवेश के अवसरों की तलाश करेंगी।
वित्त मंत्री ने राष्ट्रीय निवेश एवं अवसंरचना कोष (एनआईआईएफ) के माध्यम से निवेश सहयोग को मजबूत करने और भारत में बुनियादी ढांचे तथा हरित बदलाव से जुड़े निवेश के लिए कोरिया के आर्थिक विकास सहयोग कोष (ईडीसीएफ) के तहत प्रस्तावित रियायती ऋण सुविधा को आगे बढ़ाने का सुझाव दिया।
दोनों मंत्रियों ने भारत और दक्षिण कोरिया की क्यूआर-आधारित भुगतान प्रणालियों को एक-दूसरे के अनुकूल बनाने के लिए जारी प्रयासों पर भी चर्चा की। इससे दोनों देशों के बीच भुगतान में आसानी बढ़ेगी और आर्थिक तथा लोगों के बीच संपर्क मजबूत होंगे।
दक्षिण कोरिया के मंत्री ने भारत की वृद्धि क्षमता और भारतीय अर्थव्यवस्था के विशाल आकार का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों देशों को द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करना चाहिए, जिससे व्यापार और निवेश को बढ़ावा मिलेगा।