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भारत-यूरोपीय संघ की साझेदारी: एक नई दिशा में कदम

भारत और यूरोपीय संघ के राजदूत हर्वे डेल्फिन ने हाल ही में साझेदारी की नई ऊँचाइयों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि दोनों पक्षों ने अपने संबंधों को गुणात्मक और रणनीतिक दृष्टि से एक नए स्तर पर पहुंचा दिया है। डेल्फिन ने भारत-ईयू शिखर सम्मेलन की प्रमुख उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह साझेदारी वैश्विक स्थिरता और समृद्धि के लिए महत्वपूर्ण है। जानें इस संबंध में और क्या खास है।
 

भारत और यूरोपीय संघ के संबंधों में नई ऊँचाइयाँ

नई दिल्ली, 9 मई: यूरोपीय संघ (ईयू) के राजदूत हर्वे डेल्फिन ने कहा है कि भारत और ईयू के बीच की साझेदारी असीमित, महत्वाकांक्षी और प्रगतिशील है। उन्होंने यह भी बताया कि दोनों पक्षों ने अपने संबंधों को गुणात्मक और रणनीतिक दृष्टि से एक नए स्तर पर पहुंचा दिया है।


डेल्फिन ने एक कार्यक्रम में अपने विचार साझा करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का 'यह युद्ध का युग नहीं है' का संदेश यूरोप के मूल्यों और पहचान के साथ गहराई से जुड़ा हुआ है। उन्होंने भारत-ईयू शिखर सम्मेलन को एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया, जिसमें प्रतीकात्मकता, सार्थकता और रणनीतिक महत्व का मेल देखने को मिला।


उन्होंने कहा, 'हमने अपने संबंधों को गुणात्मक और रणनीतिक दृष्टि से पूरी तरह नए स्तर पर पहुंचा दिया है। भारत-यूरोपीय संघ की साझेदारी असीमित, महत्वाकांक्षी और प्रगतिशील है।' यह उपलब्धियां दोनों पक्षों के नेताओं के बीच राजनीतिक विश्वास और प्रतिबद्धता के बिना संभव नहीं थीं।


यूरोप दिवस समारोह के दौरान, डेल्फिन ने अगले पांच वर्षों के लिए संयुक्त रणनीतिक एजेंडा, महत्वाकांक्षी मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर वार्ता का समापन, सुरक्षा एवं रक्षा साझेदारी समझौते पर हस्ताक्षर और आवागमन संबंधी व्यापक ढांचे को अंतिम रूप देने को शिखर सम्मेलन की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल किया। उन्होंने कहा, 'भारत और यूरोपीय संघ वैश्विक स्थिरता और समृद्धि के लिए काम करने वाले विश्वसनीय साझेदार हैं।'


दोनों पक्षों के बीच मुक्त व्यापार समझौते को सभी व्यापारिक सौदों की जननी माना जा रहा है। डेल्फिन ने कहा कि हम पहले से ही भारत के प्रमुख व्यापारिक साझेदार हैं। एफटीए लागू होने के बाद, हमें उम्मीद है कि अगले वर्षों में हमारा द्विपक्षीय व्यापार दोगुना हो जाएगा। उन्होंने आर्थिक आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि लगभग 6,000 यूरोपीय कंपनियां भारत में करीब 60 लाख रोजगार सृजित कर रही हैं।


यूरोपीय संघ, एक ब्लॉक के रूप में, वस्तुओं के मामले में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। वित्त वर्ष 2024-25 के लिए भारत का ईयू के साथ कुल वस्तु व्यापार लगभग 136 अरब डॉलर रहा। डेल्फिन ने रूस-यूक्रेन युद्ध का उल्लेख करते हुए कहा कि युद्ध भारी मानवीय पीड़ा और आर्थिक नुकसान का कारण बनते हैं। उन्होंने कहा, 'प्रधानमंत्री मोदी का 'यह युद्ध का युग नहीं है' वाला संदेश यूरोप के मूल्यों और पहचान से गहराई से मेल खाता है।'