भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर 6.3% तक पहुंचने की संभावना: एसएंडपी
कच्चे तेल की कीमतों का विकास पर प्रभाव
कच्चे तेल की कीमतों का विकास दर पर पड़ेगा सीधा असर
एक प्रमुख रेटिंग एजेंसी ने भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास की संभावनाओं को उजागर किया है, खासकर जब वैश्विक व्यापार में बदलाव और पश्चिम एशिया में तनाव चल रहा है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि कच्चे तेल की कीमतों का प्रभाव भारत सहित अन्य बड़ी अर्थव्यवस्थाओं पर महत्वपूर्ण होगा।
यदि कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका विकास दर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इसके अलावा, ऊर्जा की आपूर्ति में रुकावट या ईंधन की कमी जैसी समस्याएं भी जोखिम पैदा कर सकती हैं। उच्च क्रूड कीमतों के कारण चालू खाता घाटा बढ़ सकता है, जिससे कंपनियों की लागत में वृद्धि और मुनाफे पर असर पड़ सकता है। महंगाई भी उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति को प्रभावित कर सकती है।
एसएंडपी के अनुसार विकास दर का अनुमान
एसएंडपी के अनुसार इतनी रहेगी विकास दर
एसएंडपी ने कहा है कि यदि चालू वित्त वर्ष 2026-27 में कच्चे तेल की औसत कीमत 130 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच जाती है, तो भी भारत की अर्थव्यवस्था 6.3% की दर से बढ़ सकती है। यदि कच्चे तेल की कीमत 85 डॉलर प्रति बैरल पर स्थिर रहती है, तो विकास दर 7.1% रहने की उम्मीद है, जो कि वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज होगी।
एसएंडपी के निदेशक यी फर्न फुआ ने कहा कि यह आंकड़ा किसी भी अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्था की तुलना में मजबूत है। इस संकट के समय में 6.3% की विकास दर भारत के बेहतर प्रदर्शन को दर्शाती है।
विकास दर में कमी के संभावित कारण
इसलिए कम हो सकती है विकास दर
एसएंडपी की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ऊर्जा की बढ़ती कीमतों के प्रभाव को कम करने के लिए सरकार को उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए सब्सिडी पर अधिक खर्च करना पड़ सकता है। इससे राजकोषीय दबाव बढ़ेगा, लेकिन भारत की संप्रभु क्रेडिट रेटिंग पर इसका खास असर नहीं पड़ेगा। सरकार दीर्घकाल में राजकोषीय संतुलन बनाए रखने के प्रति प्रतिबद्ध है।