भारतीय एयरलाइन उद्योग संकट में: ईंधन की कीमतें और टैक्स बढ़ने से परेशान
भारतीय एयरलाइन उद्योग की गंभीर स्थिति
भारतीय एयरलाइन क्षेत्र वर्तमान में एक चुनौतीपूर्ण स्थिति का सामना कर रहा है। 'फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस' (FIA), जिसमें प्रमुख एयरलाइंस जैसे इंडिगो, स्पाइसजेट, एयर इंडिया और गो-फर्स्ट शामिल हैं, ने सरकार को एक पत्र भेजा है। कंपनियों का कहना है कि यदि सरकार ने तुरंत हस्तक्षेप नहीं किया, तो कई एयरलाइंस का संचालन पूरी तरह से ठप हो सकता है।
एटीएफ की बढ़ती कीमतें
एयरलाइंस के लिए सबसे बड़ी समस्या एटीएफ (एविएशन टरबाइन फ्यूल) की बढ़ती कीमतें हैं। हाल के समय में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के कारण भारत में एटीएफ की कीमतें 50% तक बढ़ गई हैं। किसी भी एयरलाइन के कुल खर्च का 40% से 50% हिस्सा केवल ईंधन पर खर्च होता है। कंपनियों का कहना है कि ईंधन की कीमतें इतनी अधिक हो गई हैं कि अब उड़ानें संचालित करना उनके लिए संभव नहीं रहा।
शहरों में वैट की समस्या
भारत के प्रमुख शहरों में विमान ईंधन पर उच्च वैट (वैल्यू एडेड टैक्स) लगाया जाता है। FIA के अनुसार, दिल्ली, जो देश का सबसे बड़ा एविएशन हब है, वहां 25% वैट है। तमिलनाडु में यह दर 29% है, जबकि मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद और कोलकाता में यह 16% से 20% के बीच है। ये शहर मिलकर देश की 50% से अधिक एयरलाइंस के संचालन के लिए जिम्मेदार हैं, जिससे कंपनियों पर भारी वित्तीय दबाव पड़ रहा है।
रुपये की गिरावट का प्रभाव
पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरती कीमत ने स्थिति को और भी गंभीर बना दिया है। एयरलाइंस को अपने बड़े भुगतान डॉलर में करने होते हैं, और रुपये की कमजोरी से उनके खर्च में कई गुना वृद्धि हुई है। FIA का कहना है कि हवाई क्षेत्र के बंद होने और बढ़ते परिचालन खर्चों के कारण कंपनियां अब तक किसी तरह काम चला रही थीं, लेकिन अब स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई है।
कनेक्टिविटी पर प्रभाव
यदि सरकार ने ईंधन पर लगने वाली 11% एक्साइज ड्यूटी को अस्थायी रूप से नहीं हटाया और आर्थिक सहायता नहीं दी, तो कंपनियों को अपने विमानों को खड़ा करना पड़ सकता है। इसका परिणाम यह होगा कि उड़ानें रद्द होंगी और बचे हुए टिकटों की कीमत इतनी बढ़ जाएगी कि आम आदमी के लिए हवाई यात्रा करना मुश्किल हो जाएगा। इसके अलावा, घाटे के कारण छोटे शहरों की कनेक्टिविटी भी पूरी तरह समाप्त हो सकती है।
सरकार से अपील
FIA ने नागरिक उड्डयन सचिव समीर सिन्हा को एक पत्र में स्पष्ट किया है कि अब 'इंतजार करने' का समय नहीं है। उन्होंने सरकार से अनुरोध किया है कि विमानन क्षेत्र को बचाने के लिए तुरंत 'आपातकालीन हस्तक्षेप' किया जाए, ताकि देश की अर्थव्यवस्था और हजारों नौकरियों को सुरक्षित रखा जा सके।