भारतीय पूंजी बाजार में एनएसई और जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ की चर्चा
भारतीय पूंजी बाजार में एनएसई और जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ की चर्चा तेज हो गई है। एनएसई ने सेबी के पास अपने दस्तावेज जमा कर दिए हैं, जबकि जियो प्लेटफॉर्म्स भी आईपीओ के लिए तैयार है। दोनों कंपनियों के आईपीओ निवेशकों के लिए नए अवसर प्रदान कर सकते हैं। जानें इन आईपीओ के संभावित आकार और बाजार पर प्रभाव के बारे में।
Jun 22, 2026, 23:43 IST
एनएसई और जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ की तैयारी
वर्तमान में भारतीय पूंजी बाजार में दो प्रमुख नामों की चर्चा जोरों पर है। एक ओर है देश का सबसे बड़ा शेयर बाजार, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई), और दूसरी ओर दूरसंचार एवं डिजिटल सेवाओं की अग्रणी कंपनी, जियो प्लेटफॉर्म्स। इन दोनों कंपनियों के बहुप्रतीक्षित आईपीओ अब वास्तविकता के करीब पहुंचते नजर आ रहे हैं, जिससे निवेशकों में उत्साह बढ़ गया है।
हालिया जानकारी के अनुसार, एनएसई ने लगभग एक दशक की नियामकीय प्रक्रियाओं और विभिन्न बाधाओं के बाद अपने प्रारंभिक दस्तावेज बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के पास जमा कर दिए हैं। वहीं, रिलायंस इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष मुकेश अंबानी ने कंपनी की 49वीं वार्षिक आम बैठक में बताया कि जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ को भी आवश्यक मंजूरी मिल चुकी है और इसके दस्तावेज सेबी में दाखिल किए जाएंगे।
यह ध्यान देने योग्य है कि एनएसई का प्रस्तावित आईपीओ पूरी तरह से बिक्री प्रस्ताव आधारित होगा, जिसमें मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी का लगभग छह प्रतिशत बेचेंगे। इस निर्गम का आकार 28,000 से 30,000 करोड़ रुपये के बीच होने की संभावना है, और एनएसई का मूल्यांकन लगभग पांच लाख करोड़ रुपये के आसपास है।
दूसरी ओर, जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ नए शेयर जारी करने के माध्यम से लाया जाएगा, जिसमें कंपनी लगभग 27 करोड़ नए शेयर जारी कर सकती है। बाजार विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह निर्गम 34,000 करोड़ रुपये से अधिक का हो सकता है, जिससे यह भारत के सबसे बड़े आईपीओ में शामिल हो सकता है।
यह महत्वपूर्ण है कि दोनों कंपनियों का कारोबार विभिन्न क्षेत्रों से संबंधित है। एनएसई को देश के पूंजी बाजार की धुरी माना जाता है, जहां प्रतिदिन करोड़ों रुपये के शेयर, वायदा, विकल्प और अन्य वित्तीय उत्पादों के सौदे होते हैं। देश में बढ़ती निवेश संस्कृति और डीमैट खातों की संख्या का सीधा लाभ एनएसई को मिलता है।
वहीं, जियो प्लेटफॉर्म्स ने 2016 के बाद से भारत के डिजिटल परिदृश्य को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सस्ते इंटरनेट और डिजिटल सेवाओं के माध्यम से कंपनी ने करोड़ों उपभोक्ताओं तक अपनी पहुंच बनाई है। अब कंपनी कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्लाउड सेवाओं, डेटा केंद्रों और डिजिटल व्यापार जैसे क्षेत्रों में भी विस्तार कर रही है।
सूत्रों के अनुसार, एनएसई वित्त वर्ष 2025-26 में 10,000 करोड़ रुपये से अधिक का शुद्ध लाभ दर्ज कर चुका है, जबकि जियो को निवेशक भविष्य की विकास संभावनाओं के आधार पर देख रहे हैं। यही कारण है कि दोनों आईपीओ निवेशकों को विभिन्न प्रकार के अवसर प्रदान कर सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि एनएसई भारत में बढ़ती वित्तीय जागरूकता और निवेश संस्कृति का प्रतीक है, जबकि जियो देश की डिजिटल क्रांति और तकनीकी बदलाव का प्रतिनिधित्व करता है। यदि दोनों आईपीओ समय पर बाजार में आते हैं, तो वर्ष 2026 भारतीय पूंजी बाजार के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में याद किया जा सकता है। निवेशकों की नजर अब इन दोनों बड़े सार्वजनिक निर्गमों की कीमत, मूल्यांकन और बाजार में उनकी प्रतिक्रिया पर टिकी हुई है।