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भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में हड़ताल की तैयारी, अधिकारियों का विरोध

भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में एक बार फिर हड़ताल की तैयारी की जा रही है। इंडियन ओवरसीज बैंक के अधिकारियों ने प्रबंधन की नई नीतियों के खिलाफ 2 मार्च को एक दिन की हड़ताल का ऐलान किया है। इस कदम को एआईबीओसी का समर्थन प्राप्त है, जो कार्य संस्कृति में बदलाव की चिंता जता रहा है। अधिकारियों की प्रमुख मांगों में मानवीय कार्य समय की बहाली और पारदर्शी प्रशासन शामिल हैं। आंदोलन की रूपरेखा में क्षेत्रीय प्रदर्शन और धरने का आयोजन भी शामिल है।
 

बैंकिंग क्षेत्र में हड़ताल का ऐलान

भारतीय बैंकिंग उद्योग में एक बार फिर हलचल देखने को मिल रही है। इंडियन ओवरसीज बैंक के अधिकारियों के संगठन, आईओबीओए, ने 2 मार्च को एक दिन की देशव्यापी हड़ताल का निर्णय लिया है। यह कदम प्रबंधन द्वारा लागू की जा रही निगरानी प्रणाली और कार्यस्थल की नई नीतियों के खिलाफ उठाया गया है।


एआईबीओसी का समर्थन

इस निर्णय को एआईबीओसी का समर्थन प्राप्त हुआ है। महासंघ का कहना है कि हाल की घटनाएं कार्य संस्कृति में गंभीर बदलाव की ओर इशारा करती हैं। आरोप है कि अधिकारियों को जबरन देर तक काम करने के लिए मजबूर किया जा रहा है, और दिन के अंत में एकतरफा प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं, जिससे पेशेवर स्वतंत्रता प्रभावित हो रही है।


प्रबंधन की प्रतिक्रिया

संगठन ने पहले भी प्रबंधन को ज्ञापन देकर मनोबल, मानसिक स्वास्थ्य और संस्थागत कार्यप्रणाली पर पड़ने वाले प्रभावों के बारे में चिंता व्यक्त की थी। हालांकि, वर्तमान में इन मुद्दों पर संतोषजनक प्रतिक्रिया नहीं मिली है।


दमनात्मक कदमों का आरोप

संघ ने यह भी आरोप लगाया है कि आंदोलन की सूचना देने के बाद एसोसिएशन के कार्यालय को बंद कर दिया गया और पदाधिकारियों को प्रवेश से रोका गया, जिसे महासंघ ने ‘दमनात्मक’ कदम बताया है। बयान में कहा गया है कि यह ट्रेड यूनियन अधिकारों और द्विपक्षीय औद्योगिक संबंधों पर सीधा हमला है।


बैंक के वित्तीय प्रदर्शन में सुधार

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब बैंक ने दिसंबर 2025 तिमाही में बेहतर वित्तीय प्रदर्शन दर्ज किया है। रिपोर्ट के अनुसार, शुद्ध लाभ में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और एनपीए जैसे परिसंपत्ति गुणवत्ता संकेतकों में सुधार देखा गया है। संगठन का कहना है कि अधिकारियों की मेहनत के बावजूद, भरोसे पर आधारित प्रशासन के बजाय कठोर नियंत्रण लागू किए जा रहे हैं।


मुख्य मांगें

एसोसिएशन की प्रमुख मांगों में मानवीय कार्य समय की बहाली, कुछ एचआर प्रावधानों की वापसी, पारदर्शी प्रशासन, पर्याप्त भर्ती और अवकाश स्वीकृति में कथित मनमानी को रोकना शामिल है।


आंदोलन की रूपरेखा

आंदोलन की योजना के तहत 23 फरवरी को क्षेत्रीय केंद्रों पर प्रदर्शन, 26 फरवरी को धरना और अंत में 2 मार्च को राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आयोजन किया जाएगा। बैंकिंग सेवाओं पर इसका प्रभाव क्या होगा, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा, लेकिन फिलहाल प्रबंधन और अधिकारियों के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है।