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भारतीय रिजर्व बैंक की विदेशी मुद्रा जमा योजना को मिल रहा है अच्छा समर्थन

भारतीय रिजर्व बैंक ने विदेशी मुद्रा गैर-निवासी जमा योजना को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया की जानकारी दी है। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि इस योजना के तहत बैंकों को अपेक्षित धनराशि मिल रही है। योजना का उद्देश्य विदेशी मुद्रा की आमद बढ़ाना और घरेलू बैंकिंग प्रणाली में तरलता को मजबूत करना है। 31 जुलाई 2026 तक इस योजना के तहत 40.816 अरब डॉलर की राशि जुटाई जा चुकी है। जानें रुपये की स्थिति और भविष्य की संभावनाओं के बारे में।
 

विदेशी मुद्रा जमा योजना का समर्थन

भारतीय रिजर्व बैंक ने बताया है कि विदेशी मुद्रा गैर-निवासी जमा योजना को निवेशकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। केंद्रीय बैंक के अनुसार, इस योजना के तहत निरंतर विदेशी पूंजी का प्रवाह हो रहा है, और इसे समय से पहले बंद करने का कोई इरादा नहीं है। इसके अलावा, यदि वैश्विक परिस्थितियाँ सामान्य रहती हैं, तो आने वाले समय में रुपये की स्थिति और मजबूत हो सकती है।


गवर्नर का बयान

भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि इस योजना के तहत बैंकों को अपेक्षित मात्रा में धनराशि प्राप्त हो रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस योजना के लिए कोई निश्चित लक्ष्य निर्धारित नहीं किया गया है, लेकिन भविष्य में अच्छे निवेश की उम्मीद बनी हुई है।


योजना की शुरुआत

यह विशेष योजना 5 जून 2026 को शुरू की गई थी, जिसका उद्देश्य विदेशी मुद्रा की आमद को बढ़ाना और घरेलू बैंकिंग प्रणाली में तरलता को मजबूत करना था। यह योजना 8 जून 2026 से लागू हुई, जिसके बाद कई बैंकों ने विदेशी मुद्रा जमा योजनाओं पर ब्याज दरें बढ़ाई हैं, ताकि विदेश में रहने वाले भारतीयों को अधिक निवेश के लिए आकर्षित किया जा सके।


राशि का संग्रह

31 जुलाई 2026 तक इस योजना के तहत कुल 40.816 अरब डॉलर की राशि जुटाई जा चुकी है, जिसमें विदेशी मुद्रा गैर-निवासी जमा योजना का योगदान 36.725 अरब डॉलर रहा है। यह आंकड़ा 2013 में इसी तरह की योजना के तहत जुटाए गए लगभग 26 अरब डॉलर से अधिक है। खास बात यह है कि यह उपलब्धि योजना के शुरू होने के दो महीने से भी कम समय में हासिल की गई है।


निवेश का विवरण

इस कुल राशि में विदेशी उधारी के माध्यम से 2.575 अरब डॉलर और बाहरी वाणिज्यिक उधारी के जरिए 1.516 अरब डॉलर की आमद भी शामिल है। भारतीय रिजर्व बैंक का मानना है कि इन निवेशों से देश की बाहरी वित्तीय स्थिति और अधिक मजबूत हुई है।


रुपये की स्थिति

संजय मल्होत्रा ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक के पास पहले से ही मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार और स्थिर बाहरी स्थिति थी, और नई योजना ने इसे और मजबूत किया है। हालांकि, उन्होंने यह भी बताया कि केंद्रीय बैंक के पास विभिन्न देशों के निवेश का विस्तृत विवरण उपलब्ध नहीं है।


भविष्य की संभावनाएँ

रुपये की स्थिति पर पूछे जाने पर, मल्होत्रा ने कहा कि पिछले महीने में भारतीय मुद्रा में मजबूती आई है। उनका मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव कम होता है, तो रुपये की स्थिति और बेहतर हो सकती है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान में रुपये का मूल्य उसके वास्तविक मूल्य से कम आंका जा रहा है।


रुपये का वर्तमान मूल्य

बुधवार को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.11 पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान यह 94.92 के एक महीने के उच्च स्तर तक भी पहुंचा था। हालांकि, यह स्तर 4 जून की तुलना में केवल लगभग 0.7 प्रतिशत अधिक है, जब भारतीय रिजर्व बैंक ने इस योजना की घोषणा की थी।


केंद्रीय बैंक की नीति

भारतीय रिजर्व बैंक ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि वह रुपये के लिए कोई निश्चित विनिमय दर निर्धारित नहीं करता। केंद्रीय बैंक का मानना है कि भारतीय मुद्रा का मूल्य बाजार की मांग और आपूर्ति के आधार पर तय होना चाहिए। उनका विश्वास है कि मजबूत विदेशी निवेश और स्थिर आर्थिक स्थिति से देश की वित्तीय मजबूती में सुधार होगा।