भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंचा
भारतीय अर्थव्यवस्था पर वैश्विक तनाव का प्रभाव
वैश्विक बाजार में बढ़ते तनाव का प्रभाव अब भारतीय अर्थव्यवस्था पर स्पष्ट रूप से नजर आने लगा है। बुधवार को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, रुपया कारोबार के दौरान 96.96 प्रति डॉलर तक गिर गया, जो एक रिकॉर्ड निचला स्तर माना जा रहा है। पिछले कारोबारी सत्र में, रुपया 96.6150 के स्तर तक गिर चुका था। दिन के अंत में, रुपया 96.82 प्रति डॉलर पर बंद हुआ।
रुपये की कमजोरी और उसके कारण
फरवरी के अंत में ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से रुपया 6 प्रतिशत से अधिक कमजोर हो चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता में ठहराव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने बाजार में चिंता बढ़ा दी है। इस कारण दुनियाभर के बॉंड बाजारों में बिकवाली तेज हो गई है, और निवेशकों को आशंका है कि केंद्रीय बैंक भविष्य में ब्याज दरें और बढ़ा सकते हैं।
ऊर्जा कीमतों का प्रभाव
हालांकि कच्चे तेल की कीमतें थोड़ी नरम हुई हैं, लेकिन वे अभी भी लगभग 110 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने हाल ही में कहा था कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की संभावना पूरी तरह खत्म नहीं हुई है, लेकिन उन्होंने बातचीत के लिए कुछ और समय देने की बात कही है।
भारत के भुगतान संतुलन पर चिंता
बढ़ती ऊर्जा कीमतों और कमजोर विदेशी निवेश प्रवाह ने भारत के चालू वित्त वर्ष के भुगतान संतुलन को लेकर चिंता बढ़ा दी है। विश्लेषकों का कहना है कि महंगे तेल आयात से भारत पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से खरीदता है।
डीबीएस बैंक की रिपोर्ट
डीबीएस बैंक के विश्लेषकों ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि यह बाहरी ऊर्जा संकट भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका साबित हो रहा है, जिसके कारण रुपया लगातार दबाव में है। बैंक ने वर्ष 2026 के लिए रुपये का अनुमानित दायरा पहले 90 से 95 प्रति डॉलर रखा था, जिसे अब 95 से 100 प्रति डॉलर कर दिया गया है।
सरकारी बैंकों की भूमिका
इस बीच, बाजार में चर्चा है कि सरकारी बैंकों ने डॉलर बेचकर रुपये को और गिरने से रोकने की कोशिश की। कारोबारियों का मानना है कि यह बिक्री भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा कराई गई हो सकती है। एक निजी बैंक के कारोबारी ने बताया कि बाजार में डॉलर की मांग लगातार बनी हुई है, जबकि बड़ी मात्रा में डॉलर की आपूर्ति मुख्य रूप से रिजर्व बैंक की ओर से ही आ रही है।
एशिया में अन्य देशों पर प्रभाव
केवल भारत ही नहीं, बल्कि एशिया के अन्य देशों पर भी इस संकट का असर दिखाई दे रहा है। इंडोनेशिया के केंद्रीय बैंक ने अपनी मुद्रा रुपिया को संभालने के लिए उम्मीद से ज्यादा 50 आधार अंक की ब्याज दर बढ़ोतरी की है। इंडोनेशियाई मुद्रा भी हाल के दिनों में लगातार रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच रही थी।
भविष्य की संभावनाएं
आर्थिक जानकारों का कहना है कि यदि अमेरिका-ईरान तनाव जल्दी कम नहीं हुआ, तो आने वाले महीनों में तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं। इसका सीधा असर भारत जैसे तेल आयातक देशों की मुद्रा, महंगाई और आम लोगों की जेब पर पड़ सकता है।