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भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले गिरकर नए निचले स्तर पर पहुंचा

भारतीय रुपया बुधवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 76 पैसे की गिरावट के साथ 91.73 के नए निचले स्तर पर बंद हुआ। वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता और विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली ने इस गिरावट को बढ़ाया। जानें इस गिरावट के पीछे के कारण और बाजार की वर्तमान स्थिति के बारे में।
 

भारतीय रुपया का हाल: गिरावट का सामना

बुधवार को भारतीय रुपया (INR) अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 76 पैसे की गिरावट के साथ 91.73 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ। वैश्विक बाजारों में बढ़ती अनिश्चितता और घरेलू शेयर बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की निरंतर बिकवाली ने भारतीय मुद्रा पर भारी दबाव डाला।


बाजार का हाल: शुरुआत से अंत तक गिरावट

अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर स्थिति में खुला और दिनभर के कारोबार में 91.74 का इंट्रा-डे निचला स्तर भी छुआ। मंगलवार को रुपया 90.97 पर बंद हुआ था, जिससे आज की गिरावट पिछले कई महीनों में सबसे बड़ी एकदिवसीय गिरावटों में से एक मानी जा रही है।


विश्लेषकों की राय

करेंसी विशेषज्ञों के अनुसार, 21 जनवरी को भारतीय रुपया फिर से दबाव में आया, जब दोपहर के कारोबार में यह अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 91.74 के नए रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। यह स्थिति ग्रीनलैंड विवाद से जुड़े जोखिमों और विदेशी निवेशकों द्वारा भारतीय इक्विटी में लगातार बिकवाली के कारण उत्पन्न हुई।


दोपहर के कारोबार में स्थिति

दोपहर 2:12 बजे, स्थानीय करेंसी अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 91.68 पर कारोबार कर रही थी, जबकि यह 91.74 पर भी पहुंच गई थी। यह 91.08 पर खुली, जबकि पिछले बंद भाव 90.97 था। यह 90.9750 के मुकाबले 0.8% गिरकर 91.6950 पर बंद हुई।


विशेषज्ञों की टिप्पणी

फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स LLP के ट्रेजरी हेड अनिल कुमार भंसाली ने कहा, "ट्रंप के ग्रीनलैंड मुद्दे, जापान बॉंड की बिकवाली और जोखिम से बचने की भावना के कारण रुपया फिर से 91.74 के नए निचले स्तर पर आ गया, जिससे इक्विटी भी नीचे आ गई।"


तीन महीनों में सबसे बड़ी गिरावट

पिछले तीन महीनों में रुपये में यह सबसे बड़ी एक दिन की गिरावट है। मौजूदा गिरावट के साथ, घरेलू करेंसी 2026 में अब तक 1.98 प्रतिशत की गिरावट के साथ एशियाई देशों में दूसरी सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली करेंसी बन गई है। भंसाली ने बताया कि FPIs ने जनवरी में अब तक भारतीय इक्विटी में 33,000 करोड़ रुपये की बिकवाली की है।


आर्थिक कारक

भारत-अमेरिका व्यापार सौदे में देरी, अमेरिकी टैरिफ में वृद्धि और कीमती धातुओं के कारोबार में डॉलर की बढ़ती मांग ने इस गिरावट को और बढ़ा दिया है।