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भारतीय रुपया गिरावट के नए स्तर पर, जानें इसके कारण

भारतीय रुपया शुक्रवार को एक नए ऐतिहासिक स्तर पर गिर गया, जो 93 रुपये के पार पहुंच गया। इस गिरावट के पीछे कई कारण हैं, जैसे कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, विदेशी निवेशकों की निकासी और अमेरिकी फेडरल रिजर्व का रुख। जानें इस गिरावट के प्रभाव और भविष्य की संभावनाओं के बारे में।
 

भारतीय रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर

शुक्रवार को भारतीय रुपया एक नए ऐतिहासिक स्तर पर गिर गया। डॉलर की लगातार मजबूती और वैश्विक जोखिम से बचने की प्रवृत्ति के चलते रुपये पर भारी दबाव पड़ा, और यह पहली बार 93 रुपये के स्तर को पार कर गया। शुरुआती कारोबार में, रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 93.15 रुपये पर पहुंच गया। भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के कारण रुपये की गिरावट का यह सिलसिला जारी रहा।


गिरावट के मुख्य कारण: क्यों टूट रहा है रुपया?

रुपये की इस ऐतिहासिक कमजोरी के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारक जिम्मेदार हैं:


कच्चे तेल का उबाल: मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतें $100-$120 प्रति बैरल के बीच हैं। भारत अपनी तेल जरूरतों का 80% से अधिक आयात करता है, जिससे आयात बिल बढ़ने और चालू खाता घाटा बढ़ने का सीधा असर रुपये पर पड़ा है.


सेफ-हेवन एसेट्स की मांग: वैश्विक अनिश्चितता के माहौल में, निवेशक जोखिम भरे उभरते बाजारों से पैसा निकालकर सुरक्षित निवेश जैसे अमेरिकी डॉलर और सोने की ओर रुख कर रहे हैं.


FII की लगातार निकासी: विदेशी संस्थागत निवेशक भारतीय शेयर बाजार से अपना निवेश निकाल रहे हैं, जिससे डॉलर की मांग बढ़ी है और रुपये की स्थिति कमजोर हुई है.


अमेरिकी फेडरल रिजर्व का रुख: फेड ने ब्याज दरों में कटौती की संभावना को कम बताया है, जिससे डॉलर इंडेक्स में मजबूती बनी हुई है.


आगे की संभावनाएँ

विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय इक्विटी बाजार से विदेशी संस्थागत निवेशकों का बाहर जाना भी रुपये की गिरावट का एक कारण है। अनिश्चितता के माहौल में, वैश्विक फंडों ने भारतीय बाजार में अपने निवेश को कम कर दिया है.


रुपये की कमजोरी से आयातित महंगाई बढ़ सकती है, विशेषकर ईंधन और अन्य वस्तुओं के क्षेत्र में। इसका प्रभाव व्यवसायों और उपभोक्ताओं पर भी पड़ेगा, जिससे उनकी लागत में वृद्धि हो सकती है.


अब कारोबारी कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक जोखिम के माहौल और भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा मुद्रा को स्थिर करने के लिए संभावित हस्तक्षेप के संकेतों पर ध्यान देंगे.