भारतीय रुपये में गिरावट का सिलसिला जारी, डॉलर के मुकाबले 94.93 पर बंद
भारतीय रुपये की स्थिति
शुक्रवार को भारतीय रुपये की कमजोरी का सिलसिला लगातार दूसरे दिन भी जारी रहा। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में 12 पैसे की गिरावट आई, जिससे यह 94.93 के स्तर पर बंद हुआ। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, घरेलू शेयर बाजार में सुस्ती और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव ने रुपये पर दबाव डाला। विशेषज्ञों का मानना है कि सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोहियों के बीच बढ़ती तनातनी से तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है, जिसका असर रुपये पर भी पड़ सकता है।
रुपये की गिरावट का कारण
गुरुवार को भी रुपये में 43 पैसे की गिरावट आई थी, जिससे यह डॉलर के मुकाबले 94.81 पर बंद हुआ। शुक्रवार को इंटरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपये ने 94.78 पर कारोबार शुरू किया, लेकिन यह गिरकर 94.98 के निचले स्तर तक पहुंच गया और अंत में 94.93 पर बंद हुआ। लगातार गिरावट से विदेशी मुद्रा बाजार में दबाव की स्थिति बनी हुई है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार का प्रभाव
विदेशी मुद्रा कारोबारियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की मजबूती और कच्चे तेल की ऊंची कीमतें रुपये के लिए चुनौती बनी हुई हैं। वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड की कीमत वायदा कारोबार में 1.01% बढ़कर 114.31 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा विदेशों से खरीदता है, जिससे कच्चा तेल महंगा होने पर आयात का खर्च बढ़ता है और डॉलर की मांग में तेजी आ सकती है, जिससे रुपये पर दबाव बढ़ता है।
घरेलू शेयर बाजार की स्थिति
घरेलू शेयर बाजार में भी शुक्रवार को कमजोरी देखी गई। सेंसेक्स 125.56 अंक गिरकर 73,123.83 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 87.65 अंक टूटकर 22,600 पर आ गया। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार से शुद्ध रूप से ₹3,458.70 करोड़ के शेयर बेचे। इस बिकवाली से रुपये पर दबाव बढ़ने की आशंका है।
जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ
हालांकि, जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ से विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर की उपलब्धता को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। शुक्रवार दोपहर 12:03 बजे तक इस निर्गम के लिए 19.75 करोड़ उपलब्ध शेयरों के मुकाबले 136.32 करोड़ शेयरों की मांग आई थी, यानी इसे करीब 7 गुना चंदा मिला। योग्य संस्थागत खरीदारों की श्रेणी में मांग 14.46 गुना रही। इस श्रेणी में घरेलू वित्तीय संस्थानों ने 34.51 करोड़ और विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 26.95 करोड़ शेयरों के लिए बोली लगाई। रुपये की आगे की चाल अब कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेशकों के रुख और वैश्विक डॉलर की मजबूती पर काफी हद तक निर्भर रहने वाली है।