भारतीय वायुसेना के लिए तेजस MK-1A विमानों की आपूर्ति जल्द शुरू होगी
तेजस MK-1A विमानों की आपूर्ति की तैयारी
भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों के बेड़े को सुदृढ़ करने के लिए एक महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) ने संकेत दिया है कि वह तेजस MK-1A लड़ाकू विमानों की आपूर्ति इस वर्ष के अंत तक शुरू कर सकती है। कंपनी के अध्यक्ष रवि के. ने बताया कि विमानों से संबंधित अंतिम चरण का कार्य चल रहा है। कुछ रडार से जुड़ी समस्याएं और हथियारों के एकीकरण का अंतिम परीक्षण अभी बाकी है।
समय पर आपूर्ति की उम्मीद
रवि के. ने एक मीडिया चैनल को दिए अपने पहले साक्षात्कार में कहा कि इन समस्याओं को लगभग एक महीने में हल करने की उम्मीद है। इसके बाद विमानों को वायुसेना को सौंपने के लिए तैयार किया जा सकेगा। मौजूदा जानकारी के अनुसार, पहली खेप की आपूर्ति दिसंबर के आसपास शुरू होने की संभावना है।
वायुसेना की लड़ाकू विमान की कमी
तेजस MK-1A भारतीय वायुसेना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, खासकर जब वायुसेना वर्तमान में लड़ाकू विमानों की कमी का सामना कर रही है। उसके पास अधिकृत 42.5 स्क्वाड्रन के मुकाबले केवल 30 स्क्वाड्रन ही सक्रिय हैं। इस स्थिति में नए विमानों की समय पर तैनाती को लेकर वायुसेना की चिंताएं बढ़ी हुई हैं।
बड़े सौदों की जानकारी
भारतीय वायुसेना ने तेजस MK-1A के लिए दो महत्वपूर्ण सौदे किए हैं। पहला सौदा फरवरी 2021 में 83 विमानों के लिए हुआ था, जिसकी कुल लागत लगभग 48 हजार करोड़ रुपये थी। इसके बाद सितंबर 2025 में 97 विमानों के लिए दूसरा समझौता किया गया। दोनों सौदों की कुल लागत लगभग 1.1 लाख करोड़ रुपये है। जिन विमानों की आपूर्ति जल्द शुरू होने वाली है, वे पहले सौदे का हिस्सा हैं।
विमानों की आपूर्ति का लक्ष्य
एचएएल ने वित्त वर्ष 2026-27 में वायुसेना को लगभग 10 तेजस MK-1A विमानों की आपूर्ति का लक्ष्य रखा है। रवि के. के अनुसार, कंपनी को अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक से 10 इंजन प्राप्त हो चुके हैं, जबकि 27 विमानों के ढांचे तैयार हैं। उनका कहना है कि इंजन मिलने पर तैयार विमानों को तुरंत आगे भेजा जा सकता है।
कार्यक्रम में देरी
हालांकि, तेजस MK-1A कार्यक्रम पहले ही कुछ देरी का सामना कर चुका है। 2021 में हुए पहले सौदे के तहत विमानों की आपूर्ति मार्च 2024 से शुरू होनी थी, लेकिन यह संभव नहीं हो सका। इसमें जनरल इलेक्ट्रिक द्वारा AF-404 इंजन की समय पर आपूर्ति न होना और कुछ आवश्यक प्रमाणपत्रों में देरी जैसे कारण शामिल रहे हैं।
भविष्य की योजनाएं
रवि के. ने कहा कि यदि इंजन की आपूर्ति नियमित रहती है, तो एचएएल तीन से चार वर्षों में पहले सौदे को पूरा कर सकती है। कंपनी ने इंजन की उपलब्धता में उतार-चढ़ाव के बावजूद विमान के ढांचे का निर्माण जारी रखा है, ताकि इंजन मिलते ही उन्हें जल्दी से विमानों में परिवर्तित किया जा सके।
स्वदेशी तकनीक का उपयोग
दूसरे सौदे के तहत बनाए जाने वाले 97 तेजस MK-1A विमानों में पहले की तुलना में अधिक स्वदेशी तकनीक का उपयोग किया जाएगा। इनमें उत्तम सक्रिय इलेक्ट्रॉनिक रूप से स्कैन की जाने वाली रडार प्रणाली और स्वयम रक्षा कवच इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली जैसे स्वदेशी उपकरण शामिल होंगे। पहले 83 विमानों में इस्तेमाल होने वाली लगभग 40 विदेशी प्रणालियों को भी धीरे-धीरे स्वदेशी प्रणालियों से बदलने की योजना है।
MK-2 संस्करण पर प्रगति
तेजस के अधिक उन्नत MK-2 संस्करण पर भी काम जारी है। एचएएल के अनुसार, इस विमान का ढांचा तैयार हो चुका है और इसके विभिन्न हिस्सों को जोड़ दिया गया है। कंपनी मार्च 2027 तक इसका पहला जमीन पर इंजन परीक्षण करने का लक्ष्य रखती है। पहली उड़ान उसी वर्ष बाद में होने की उम्मीद है। हालांकि, MK-2 के लिए मुख्य अनुबंध पर अभी हस्ताक्षर होना बाकी है।
संयुक्त उत्पादन की योजना
MK-2 विमान के लिए अधिक शक्तिशाली AF-414 इंजन के देश में संयुक्त उत्पादन की योजना पर एचएएल जनरल इलेक्ट्रिक के साथ बातचीत कर रही है। भारत के पास इस इंजन की कुछ इकाइयां पहले से हैं, जिनका उपयोग MK-2 के प्रारंभिक नमूनों में किया जा सकता है।
तकनीकी मुद्दों का समाधान
रवि के. ने बताया कि AF-414 इंजन के देश में संयुक्त उत्पादन से जुड़े तकनीकी मुद्दे सुलझ चुके हैं। अब जनरल इलेक्ट्रिक की ओर से कारोबारी प्रस्ताव का इंतजार है। इसके बाद कीमत और अन्य शर्तों पर बातचीत शुरू होगी। इस समझौते में लगभग 80 प्रतिशत तकनीक भारत को मिलने की संभावना है।
तेजस कार्यक्रम का महत्व
तेजस कार्यक्रम को आने वाले वर्षों में भारतीय वायुसेना की लड़ाकू क्षमता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। उम्मीद है कि आने वाले दशकों में वायुसेना के पास MK-1, MK-1A और MK-2 को मिलाकर लगभग 350 तेजस विमान होंगे। इस प्रकार, MK-1A की समय पर आपूर्ति और MK-2 का विकास दोनों ही वायुसेना के लड़ाकू बेड़े को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण हैं। वर्तमान में एचएएल की प्राथमिकता MK-1A से जुड़े अंतिम तकनीकी कार्यों को पूरा कर इस वर्ष के अंत तक आपूर्ति शुरू करना है।