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भारतीय शेयर बाजार की दिशा: कच्चे तेल की कीमतें और भू-राजनीतिक घटनाक्रम

इस सप्ताह भारतीय शेयर बाजार की दिशा कच्चे तेल की कीमतों और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों से प्रभावित होने की संभावना है। विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा रूस और ईरान पर नए प्रतिबंधों के कारण व्यापारिक अनिश्चितता बढ़ गई है। इसके अलावा, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और अमेरिकी बॉण्ड प्रतिफल पर भी नजर रहेगी। जानें इस विषय पर और क्या कहते हैं विशेषज्ञ।
 

भारतीय शेयर बाजार की संभावित दिशा

इस सप्ताह भारतीय शेयर बाजार की दिशा मुख्य रूप से कच्चे तेल की कीमतों, पश्चिम एशिया में चल रहे भू-राजनीतिक घटनाक्रमों और वैश्विक बाजार के रुख से प्रभावित होगी। इसके साथ ही, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और अमेरिकी बॉण्ड प्रतिफल पर भी निवेशकों की नजर रहेगी।


विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा रूस और ईरान पर नए प्रतिबंधों से संबंधित कानून पर हस्ताक्षर करने के बाद भारतीय बाजार में व्यापारिक अनिश्चितता बढ़ गई है। एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर. ने कहा कि इस सप्ताह कच्चे तेल की कीमतें, बॉण्ड प्रतिफल और भू-राजनीतिक घटनाक्रम बाजार की धारणा को प्रभावित करेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि रूस से भारत की कच्चे तेल की खरीद को देखते हुए अमेरिका की नई व्यापार नीति का बाजार पर प्रभाव पड़ सकता है।


रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ पर हस्ताक्षर किए हैं। यह कानून रूस और ईरान पर मौजूदा प्रतिबंधों को बढ़ाता है और रूस से कच्चा तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाने का अधिकार देता है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि किन देशों पर कितनी दर से शुल्क लगाया जाएगा।


इसलिए भारत पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है। रेलिगेयर ब्रोकिंग के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (शोध) अजित मिश्रा ने कहा कि अमेरिका-ईरान तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और अमेरिकी बॉण्ड पर प्रतिफल बाजार की दिशा तय करने वाले महत्वपूर्ण कारक होंगे। इस बीच, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने सितंबर में अब तक भारतीय शेयरों से लगभग 20,974 करोड़ रुपये की निकासी की है।


ऊंची कच्चे तेल की कीमतें, अमेरिका में उच्च ब्याज दरें, बॉण्ड बाजार और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच विदेशी निवेशकों की बिकवाली बाजार के लिए महत्वपूर्ण बनी हुई है। स्वस्तिका इन्वेस्टमार्ट के शोध प्रमुख संतोष मीणा ने कहा कि आने वाले दिनों में भारत, अमेरिका और यूरो क्षेत्र के पीएमआई आंकड़ों के साथ-साथ अमेरिका के श्रम बाजार के आंकड़ों पर निवेशकों की नजर रहेगी। घरेलू बाजार में 24 सितंबर को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज की सूचीबद्धता भी एक महत्वपूर्ण घटना होगी।


नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के 22,569 करोड़ रुपये के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) को दूसरे दिन ही पूर्ण अभिदान मिल गया है। पिछले सप्ताह बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 486.8 अंक यानी 0.65 प्रतिशत गिरा, जबकि एनएसई निफ्टी में 51.7 अंक यानी 0.22 प्रतिशत की कमी आई।