भारतीय शेयर बाजार की मजबूती के बावजूद वैश्विक मंदी का असर
भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत
गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 को वैश्विक मंदी और महंगाई के दबावों के बावजूद भारतीय शेयर बाजार ने मजबूती के साथ शुरुआत की। शुरुआती कारोबार में भारतीय रुपया भी मजबूत दिखाई दिया। हालांकि, प्रमुख सूचकांकों के बीच स्मॉलकैप और मिडकैप जैसे व्यापक सूचकांकों में सुस्ती देखी गई। बीएसई सेंसेक्स 183.91 अंक (0.25%) की बढ़त के साथ 72,965.80 पर खुला, जबकि एनएसई निफ्टी 50 48.60 अंक बढ़कर 22,671.30 पर खुला। पिछले कारोबारी सत्र में सेंसेक्स 72,781.89 और निफ्टी 22,622.70 पर बंद हुए थे.
स्मॉलकैप और मिडकैप में सुस्ती
पिछले कारोबारी सत्र में सेंसेक्स 72,781.89 पर और निफ्टी 50 22,622.70 पर बंद हुआ था। हालांकि, शुरुआती सत्र में व्यापक सूचकांक लाल निशान में कारोबार करते दिखे। BSE मिडकैप सिलेक्ट इंडेक्स 3.16 अंक नीचे आया, जबकि BSE स्मॉलकैप सिलेक्ट इंडेक्स 17.31 अंक (0.19%) गिरकर 8,995.66 पर आ गया.
शेयरों में तेजी और गिरावट
सेंसेक्स में शामिल कुछ शेयरों में TCS, M&M, HCL टेक, टेक महिंद्रा और रिलायंस में तेजी रही। शुरुआती कारोबार में TCS 2.26% की बढ़त के साथ सबसे आगे रहा। दूसरी ओर, सन फार्मा, पावर ग्रिड, बजाज फाइनेंस, इंडिगो और NTPC में गिरावट देखी गई, जिसमें सन फार्मा 1.08% नीचे रहा। शुरुआती कारोबार में बाजार का रुख नकारात्मक रहा; NSE पर 1,106 शेयरों में तेजी के मुकाबले 1,188 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई।
गिफ्ट निफ्टी के संकेत
निफ्टी 50 के शुरुआती संकेतक 'गिफ्ट निफ्टी' ने आज नकारात्मक शुरुआत का संकेत दिया। यह पिछले बंद भाव 22,622.50 के मुकाबले 97.5 अंक गिरकर 22,525 पर खुला। बुधवार को विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) बिकवाल बने रहे और 14 अक्टूबर, 2026 को उन्होंने 1,857.44 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशक (DIIs) खरीदार बने रहे और उन्होंने 2,670.44 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे.
विश्लेषकों की राय
चॉइस ब्रोकिंग प्राइवेट लिमिटेड के टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट हितेश टेलर ने कहा, "गिफ्ट निफ्टी में बढ़त के चलते बाजार की शुरुआत थोड़ी सकारात्मक हो सकती है, लेकिन कुल मिलाकर बाजार को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है। वैश्विक स्तर पर बनी अनिश्चितता और हाल ही में हुई प्रॉफिट बुकिंग बाजार की तेजी को सीमित कर सकती है। बढ़ती अस्थिरता और FIIs की लगातार बिकवाली पर ध्यान देने की जरूरत है, जबकि DIIs की खरीदारी बाजार को कुछ सहारा दे सकती है।"
एशियाई बाजारों की स्थिति
महंगाई के और खराब होने के संकेतों के बीच, अमेरिकी बाजारों में जुलाई के बाद की सबसे बड़ी गिरावट देखने को मिली, जिसका असर एशियाई बाजारों पर भी पड़ा और वहां भी शेयर गिरे। खबर लिखे जाने के समय, जापान का निक्केई 225 सूचकांक 3,478.29 अंक या 5.13 प्रतिशत गिरकर 64,266 पर आ गया। इसी तरह, हांगकांग का हैंग सेंग 367.17 अंक या 1.51 प्रतिशत गिर गया। दक्षिण कोरिया का कोस्पी 481.69 अंक या 8.72 प्रतिशत लुढ़क गया।