भारतीय शेयर बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से लगातार बढ़त
भारतीय शेयर बाजार की स्थिति
मुंबई : ईरान-युद्ध से पहले के स्तर तक कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज गिरावट और होर्मुज़ जलडमरूमध्य में सामान्य यातायात के चलते भारतीय शेयर बाजार ने लगातार तीसरे सप्ताह सकारात्मक प्रदर्शन किया।
साप्ताहिक कारोबार में निफ्टी ने 0.18 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की, जबकि अंतिम कारोबारी दिन यह 0.14 प्रतिशत बढ़कर 24,056 पर बंद हुआ। सेंसेक्स ने भी 109 अंक यानी 0.14 प्रतिशत की बढ़त के साथ 77,100 पर समापन किया। पूरे सप्ताह में सेंसेक्स में 0.39 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
घरेलू शेयर बाजार ने इस सप्ताह कई मिश्रित संकेतों के बावजूद मजबूती दिखाई। हालांकि, मिडकैप शेयरों पर हल्की बिकवाली का दबाव देखा गया।
विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में प्रगति से भू-राजनीतिक तनाव कम हुआ है। इसके साथ ही भारत और अमेरिका के बीच संभावित व्यापार समझौते की उम्मीदों ने निवेशकों का विश्वास बढ़ाया।
हालांकि, असमान मानसून वितरण के कारण महंगाई बढ़ने और ग्रामीण मांग पर असर डालने की चिंताएं भी उभरी हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है। इससे महंगाई, राजकोषीय घाटा और चालू खाते की स्थिति में सुधार होगा, जिससे भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति में लचीलापन बढ़ेगा।
साप्ताहिक कारोबार में फार्मा और हेल्थकेयर सेक्टर के शेयरों ने बेहतरीन प्रदर्शन किया। वहीं, निजी बैंकों के शेयरों में भी तेजी रही, जिसका कारण एफसीएनआर (बी) जमा स्वैप योजना पर आरबीआई की स्पष्टता थी।
दूसरी ओर, कमोडिटी कीमतों में गिरावट के कारण मेटल सेक्टर पर दबाव बना रहा। उपभोक्ता मांग को लेकर चिंताओं के चलते कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर के शेयरों में भी कमजोरी देखी गई।
जहां प्रमुख सूचकांकों ने बढ़त दर्ज की, वहीं व्यापक बाजार में भिन्नता देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप-100 सूचकांक सप्ताह के दौरान 1.15 प्रतिशत गिर गया, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप-100 में केवल 0.03 प्रतिशत की मामूली बढ़त हुई।
विश्लेषकों के अनुसार, निकट भविष्य में निफ्टी के लिए 24,400 और 24,500 का स्तर प्रमुख प्रतिरोध रहेगा, जबकि 23,900 और 23,800 का स्तर मजबूत समर्थन माना जा रहा है।
बैंक निफ्टी के लिए 57,500-57,400 का स्तर प्रमुख सपोर्ट और 58,900-59,000 का स्तर महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस माना जा रहा है।
आने वाले हफ्तों में कंपनियों के तिमाही नतीजे बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। निवेशकों की नजर कंपनियों की मांग, मुनाफे के मार्जिन और ऑर्डर बुक पर प्रबंधन की टिप्पणियों पर रहेगी।
एक बाजार विशेषज्ञ ने कहा कि निवेशकों को संतुलित लेकिन सकारात्मक रणनीति अपनानी चाहिए और उन मजबूत कंपनियों में निवेश के अवसर तलाशने चाहिए, जिनके शेयर हाल की गिरावट के बावजूद बुनियादी रूप से मजबूत बने हुए हैं।
निवेशकों की निगाह अमेरिका के पीसीई (पर्सनल कंजम्प्शन एक्सपेंडिचर) महंगाई आंकड़ों पर रहेगी, जो वैश्विक बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होंगे। इसके अलावा, नॉन-फार्म पेरोल और बेरोजगारी दर के आंकड़े भी अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति को प्रभावित कर सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, घरेलू स्तर पर औद्योगिक उत्पादन (आईआईपी) के आंकड़े और जून महीने के पीएमआई (परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स) निवेशकों को पहली तिमाही के नतीजों से पहले अर्थव्यवस्था की स्थिति का शुरुआती संकेत देंगे।