भारतीय शेयर बाजार में गिरावट: अमेरिका-ईरान तनाव और तेल की कीमतों का प्रभाव
भारतीय बाजार में गिरावट का माहौल
नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि और अमेरिकी बॉंड यील्ड में उछाल ने भारतीय शेयर बाजार को प्रभावित किया है। कारोबार के दौरान निफ्टी लगभग 23,800 के स्तर तक पहुंच गया। ऑटो और रियल एस्टेट शेयरों पर विशेष दबाव देखा गया, जबकि कई प्रमुख कंपनियों के शेयर साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए।
बाजार में व्यापक बिकवाली
2 सितंबर को भारतीय शेयर बाजार में कारोबार की शुरुआत से ही दबाव का अनुभव हुआ। निफ्टी 50 ने 23,786 के स्तर तक गिरावट दर्ज की और दोपहर में यह लगभग 211 अंक नीचे 23,808 के आसपास कारोबार कर रहा था। सेंसेक्स भी लगभग 691 अंक गिरकर 76,252 के स्तर तक पहुंच गया। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी कमजोरी देखी गई, जहां निफ्टी मिडकैप100 लगभग 1.3 फीसदी और स्मॉलकैप100 लगभग 0.9 फीसदी नीचे कारोबार कर रहे थे।
सबसे अधिक प्रभावित शेयर
बिकवाली के चलते 106 से अधिक शेयरों ने अपने 52 हफ्ते के निचले स्तर को छुआ। इनमें रेलवे से संबंधित आरवीएनएल और आईआरसीटीसी के साथ-साथ हिंदुस्तान यूनिलीवर, फर्स्टक्राई और केईसी इंटरनेशनल जैसे नाम शामिल हैं। निफ्टी में ईचर मोटर्स पर सबसे अधिक दबाव रहा, जो लगभग 5.7 फीसदी गिर गया। बजाज ऑटो और महिंद्रा एंड महिंद्रा में भी तीन फीसदी से अधिक की गिरावट आई। ऑटो और रियल एस्टेट सेक्टर सबसे कमजोर रहे।
तेल की कीमतों में वृद्धि से चिंता
बाजार की कमजोरी के पीछे अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य तनाव एक प्रमुख कारण माना जा रहा है। इस स्थिति से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के माध्यम से कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 96 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। भारत अपनी आवश्यकताओं का लगभग 90 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है, जिससे महंगे तेल का असर अर्थव्यवस्था और तेल पर निर्भर कंपनियों पर पड़ता है।
अमेरिकी बॉंड यील्ड का प्रभाव
अमेरिकी 10 साल के ट्रेजरी पर यील्ड लगभग 4.8 फीसदी तक पहुंचने से भारतीय बाजार पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है। ऊंची अमेरिकी यील्ड वैश्विक निवेशकों को अपेक्षाकृत सुरक्षित अमेरिकी परिसंपत्तियों की ओर आकर्षित कर सकती है, जिससे उभरते बाजारों से विदेशी पूंजी के निकलने की संभावना बढ़ जाती है। इस माहौल में इंडिया VIX भी लगभग 3.6 फीसदी बढ़कर 11.92 पर पहुंच गया है। बाजार की नजर अब भू-राजनीतिक तनाव, तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर रहेगी।