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भारतीय शेयर बाजार में गिरावट: आईटी सेक्टर पर भारी दबाव

मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट आई, जिसमें सेंसेक्स और निफ्टी महत्वपूर्ण स्तरों से नीचे आ गए। आईटी कंपनियों में बिकवाली के कारण बाजार पर दबाव बना। वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता और रुपये की कमजोरी ने निवेशकों का विश्वास डगमगा दिया। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट अस्थायी हो सकती है। जानें इस स्थिति के पीछे के कारण और भविष्य की संभावनाएं।
 

मुंबई में शेयर बाजार की स्थिति


मुंबई: मंगलवार की सुबह भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट देखी गई। सेंसेक्स लगभग 730 अंक और निफ्टी 230 अंक नीचे आ गए, जिससे ये महत्वपूर्ण स्तरों से नीचे चले गए। आईटी कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली ने बाजार को सबसे अधिक प्रभावित किया।


निवेशकों का विश्वास डगमगाया

वैश्विक स्तर पर कमजोर रुख और घरेलू बाजार में रुपये की गिरावट ने निवेशकों के विश्वास को प्रभावित किया। सुबह 9:50 बजे सेंसेक्स 82,564 पर और निफ्टी 25,482 पर कारोबार कर रहा था। विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट अस्थायी हो सकती है, लेकिन वर्तमान में बाजार पर दबाव बना हुआ है।


आईटी सेक्टर में बिकवाली का कारण

आईटी सेक्टर में भारी बिकवाली


निफ्टी आईटी इंडेक्स में सुबह 9:30 बजे तक 2.84 प्रतिशत की गिरावट आई, जो पूरे बाजार में सबसे अधिक गिरावट वाला क्षेत्र बना। इसका कारण ग्लोबल एआई टूल्स से जुड़ी नई जानकारी है। एन्थ्रोपिक कंपनी के क्लॉड कोड टूल्स के दावों ने पुराने सॉफ्टवेयर सिस्टम के अपग्रेड की लागत और जटिलता को कम करने की संभावना को बढ़ा दिया, जिससे आईटी कंपनियों के भविष्य के ऑर्डर पर सवाल उठे और निवेशकों ने बिकवाली शुरू कर दी।


रुपये की स्थिति

रुपया लगातार कमजोर


रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 7 पैसे गिरकर 90.96 पर पहुंच गया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि और डॉलर की मजबूती ने इस पर दबाव डाला। घरेलू बाजार की कमजोर शुरुआत ने भी रुपये को और कमजोर किया। हालांकि, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की खरीदारी ने बड़ी गिरावट को रोक दिया। विदेशी मुद्रा व्यापारियों का कहना है कि एफआईआई के समर्थन से रुपये को और अधिक नुकसान नहीं हुआ।


वैश्विक बाजारों का प्रभाव

वैश्विक बाजारों का कमजोर रुख


एशियाई बाजारों में सुस्ती बनी रही। अमेरिकी बाजार रात भर गिरावट के साथ बंद हुए। ट्रंप ने नए व्यापार समझौतों को छोड़ने वाले देशों को सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद, वे अन्य व्यापार कानूनों के तहत अधिक ड्यूटी लगा सकते हैं। इस कारण वैश्विक निवेशकों में अनिश्चितता बढ़ी, जिसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा।


भविष्य की संभावनाएं

बाजार में आगे क्या?


विश्लेषकों का मानना है कि आईटी सेक्टर की बिकवाली और वैश्विक अनिश्चितता से दबाव बना रहेगा। लेकिन मजबूत घरेलू आर्थिक आंकड़े और एफआईआई की खरीदारी से बाजार में उछाल भी आ सकता है। निवेशकों को सतर्क रहने और दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाने की सलाह दी जा रही है। बाजार अभी अस्थिर है, लेकिन बड़े सुधार की उम्मीद भी बनी हुई है।